Monday, 25 March 2019

मेरी और मेंरे कुत्ते की प्रेम कहानी
हेलो मेरे प्यारे   दोस्तों मेरा नाम अवंतिका है ,मैं यहाँ आपको अपने जीवनके एक दिल को छू लेने वाले अनुभव को आपसे बाटना चाहती हूँ , ये एक कुत्ते के बारे में है जिसे मैंने मौत के मुँह से बचाया , तो मैं शुरू करती हूँ
एक दिन अपने दोस्तों से मिल कर  मैं घर को वापस लौट रही थी , दोस्तो  के साथ मुझे समय का कुछ पता ही ना चला ,और मैं काफी लेट हो गयी थी ,सर्दियो के दिन थे इसलिये अँधेरा भी काफी जल्दी हो जाता था,घर तक पहुंचने के दो रस्ते थे एक थोड़ा बड़ा और एक शार्ट कट ,मेरा मन उस दिन शॉर्टकट से जाने को ही कर रहा था ,पर मम्मी ने उस  रस्ते से आने के लिए खास तौर पर मना  किया था ,क्यूंकि रस्ते के बीच में एक पुराना खाली मकान था और लोगो का मानना था की उस  घर भूत रहते है , मेरा इस तरह की चीज़ो पर कोई विश्वास नहीं था, पर माँ के शब्दों का आदर मुझे रोक रहा था, अँधेरा तेज़ी से बढ़ रहा था ,सो मैं दिल कड़ा कर के शार्ट कट से ही घर की तरफ चल पड़ी ,सामने ही वह वीरान पुराना टुटा- फूटा सा घर था ,जब मैं उस के  सामने से गुज़री तो  मुझे किसी के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ी ,मेरे  मन में जिज्ञासा हुयी की देखू  आखिर ये किस की आवाज है,क्या सच ही अंदर कोई भूत है , मैंने घर के पास जा धूल से भरे खिड़की  के कांच को साफ़ किया ,और अंदर झाका , अंदर अँधेरा था पर खिड़की से आती रौशनी के कारण दिख रहा था ,बेसमेन्ट में एक टूटे हुए सोफे पर एक छोटा सा कुत्ते का बच्चा पड़ा  हुआ था, और रो रहा था।
मुझे समझ नहीं आया की उस बेचारे को वहां  किस ने फेंक दिया ,पर मैं भला उसे इतनी सर्दी में अकेला भूखा और लाचार कैसे छोड़ सकती थी , मैंने अपने पापा को फोन किया और ये सारी  बात बताई पर, पापा कुछ सुनने को त्यार ही ना थे, उन्होंने कहा नहीं बिलकुल नहीं  ,सीधी घर चली आओ ,और मैं समझ गयी थी की मेरे पापा मुझे इसे बचाने नहीं देंगे , क्यूंकि पापा को जानवरो से सख्त नफरत थी पर ’मैं  उसे इस हाल में अकेला नहीं छोड़ सकती थी ,सो मैं उस घर के बसेमेन्ट में गयी ,ताकि उसे बाहर निकल सकू ,वह मुझसे डर  रहा था पर थोड़ी ही देर में वह मेरा दोस्त बन गया ,और मैंने उसे उठा कर अपनी जैकेट में रख लिया ,वो अभी भी सर्दी से काँप रहा था मैं उसे ले कर प्रोविसन  स्टोर गयी और उसके लिए कुछ खाने का सामान खरीदा ,और घर की तरफ चल पड़ी ,अब मैं उसे बचाने के उपाय सोच रही थी ,
मुझे याद आया घर के पास ही एक छोटा सा शेड था, मैंने उसे वही रख दिया और घर वापस आ गयी ,घर का दरवाजा खोल कर मैंने देखा , मेरे माता पिता गहरी नींद में थे मैं चुप चाप किचन में गयी,और दो बाउल ले कर अपने कमरे में चली गयी और अपनी अलमारी से  अपना एक पुराना  गरम कंबल और एक पानी की बोतल ले वापस  शेड में आ गयी ,
मैने  उस  पप्पी को खानेके लिए बिस्कुट और पीने के लिए पानी दिया  ,पर वो बहुत ही डरा हुआ था, इसलिए कुछ खा नहीं रहा था, मैं उसके पास गयी, उसके सर को सहलाया उसे पुचकारा, तो वो मेरे पास आ गया ,मैं  उसे खाना दे कर और कंबल में सुला के वापस आ गयी ,पर पूरी  रात मुझे नींद नहीं आयी, और मैं  पूरी रात उस अकेले पप्पी के बारे में भी सोचती  रही। सुबह होते ही मैं माँ पापा के ऑफ़िस जाने का इंतज़ार करने लगी ,और उनके जाते ही दौड़ती हुयी शेड में चली गयी ,और दरवाज़ा खोलते ही वह छोटा सा पप्पी मेरे पास आ गया ,मुझे बहुत ख़ुशी हुयी , वो एक जर्मन शेफर्ड था, और अपनी गोलगोल आँखों से मुझे प्यार और भरोसे से देख रहा था ,
कई दिन हो गए थे वह पहले से ज्यादा मेरे करीब हो गया था , जब मैं उसे लायी थी, वो सर्दी और भूख से परेशां था पर अब , वह आराम से खा रहा था और पहले से बहुत स्वस्थ हो गया था ,पर अब एक नई परेशानी थी अब उसने भोकना शुरू कर दिया था ,इसलिए मैं बहुत डर गयी थी क्यूंकि ,मेरे माँ पापा को कभी भी वो मिल सकता था ,
इसलिए मैंने अपने   दोस्तो से पूछा की क्या किसी को पप्पी चाहिए सब ने हां ही कहा पर ,किसीके भी माता पिता उसे रखने को तैयार ना  थे  ,
मुझे उसके लिए किसी भी तरह एक ठिकाना ढूढ़ना था ,पर मैं उसे बहुत प्यार करने लगी थी और उसे अपने पास ही रखना चाहती थी ,मैंने उसके लिए एक डॉग टॉय भी ख़रीदा जिसके साथ वो बहुत खेलता,मैं रोज़ रात में माँ पापा के सोने के बाद उसके पास चली जाती और खेल कर वापस आ जाती थी मैं उसे किसी भी हाल में छोड़ना नहीं चाहती थी  , अब वह मेरे शेड में आने से बहुत खुश होता और मेरे जाने पर उदास ,आज भी मैं जब  उसे छोड़ कर जा रही थी पर वो मुझे जाने देना नहीं चाहता था पर मुझे आना पड़ा और वो ज़ोर ज़ोर से भोकने लगा ,मैं जानती थी आज मेरे माता को  पिता को इसके बारे में जरूर पता चल जायेगा ,और यही हुआ , मेरे पिता बहुत ही डिसिप्लिनड और सख्त आदमी थे, उन्होंने मुझे बुलाया और पूछा ,अवंतिका ये क्या हो रहा है ,मैंने कहा मुझे नहीं पता, वह फिर बोले  तुम आधी रात को कहा से  आ  रही हो ?
मैंने सोचा आज मैं डैडी को सब सच बता दूंगी ,डर कर मेरी आँखों से आंसू बह रहे थे पर ,मैंने डैडी को सब बता दिया , ये सुनते ही मेरे dady ज़ोर से बोले जाओ और अभी उसे घर से बाहर फ़ेंक दो ,मेरी आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे, मैं डैडी से बहुत डरती  थी ,पर मैंने कहा नहीं मैं ऐसा नहीं करुँगी , तो डैडी ने कहा ठीक है फिर मैं ही उसे बाहर फ़ेंक दूंगा ,और वो शेड की तरफ जाने लगे ,उन्होंने ज़ोर से दरवाज़ा खोला और सामने ही  छोटे से पप्पी को देखा ,वह उन्हें अपनी गोल गोल आँखों से देख रहा था और अपनी पूंछ  हिला रहा था ,वह उसे ५ सेकंड तक देखते ही रहे ,शायद वह भी वही सोच रहे थे जो मैंने उसे पहली बार देख कर सोचा था ,कुछ देर बाद वो उसे ले कर घर आ गए और मुझसे बोले, ओके अवंतिका  तुम इसे तब तक रख सकती हो जब तक इसके लिए कोई अच्छा घर नहीं मिल जाता , तब से अब तक दो साल बीत गए है और वह पप्पी मेरे डैडी का favorite है , डैडी  उसे मुझसे ज्यादा प्यार करते हैं और वो भी मुझसे ज्यादा  डैडी के पास रहता है।


आज मेरी  कक्षा बारहवीं का फेयरवेल डे था ,हम सभी लोग बहुत खुश थे मैं , एक को -एजुकेशन स्कूल में पढ़ती थी, इसलिए लड़के लड़की का भेद भाव ना करते हुए मेरे खास दोस्तों में लड़के- लड़किया सभी शामिल थे ,हम सभी ही बहुत खुश थे ,और अपनी ख़ुशी को खुल कर ज़ाहिर कर रहे थे ,स्कूल की पार्टी खत्म होने के बाद भी हम सभी का मूड अब तक पार्टी  सेलिब्रेशन का ही था , पर अब हम स्कूल में ज्यादा देर नहीं रह सकते थे ,मैं आपको बता दू  की ,मैं एक सिंगल मदर की बेटी हूँ जो  मेरे साथ नहीं रहती  थी और  मैं  एक अप्पर्टमेन्ट में, वन  रूम फ्लैट ले के रहती थी ,जो की मेरी  मा के अनुसार मेरे लिए बहुत सेफ  था,
सभी को पता था की मैं अकेली ही रहती हु, इसलिए  सबने बाकी की पार्टी मेरे घर इंजॉय करने का प्लान बनाया  जिसे मैंने तुरंत मान लिया ,हम करीब 8  लोग थे जिसमे तीन लड़के और पांच लड़किया थी ,हमने बाजार से बियर की 25  बोतले खरीदी कुछ खाने का सामान लिया और बस चल पड़े , मैं म्यूजिक की शौकीन थी इसलिए मेरे घर में mom का दिया एक music systm भी था , मैं beer नहीं पीती थी पर डांस का जूनून था मुझे ,और फिर आज स्कूल में हुए beauty कॉम्पिटिशन में मुझे मिस ब्यूटीफुल चुना गया था,और इतना ही नहीं gk quiz में भी मुझे first प्राइज मिला था ,और प्रीओन्सिपल ने मुझे ब्यूटी विथ ब्रेन का स्पेशल award भी दिया था सो मैं  बहुत खुश थी , मेरे पापा के दोस्त का बेटा स्वप्निल मेरा प्यारा दोस्त था और मैं उससे पसंद भी करती थी ,सो मैंने घर पहुंच के इस party में उससे भी बुला लिया था , हमारी party फुल bloom पे थी मैं आधे घंटे से लगातार नाच रही थी ,की  दूर बेल बजी ,दरवाज़ा खोलने पर सामने ही स्वप्निल खड़ा था ,उसे देख कर मैं बहुत खुश हुयी और उसे गले लगा लिया , पर मेरा इरादा बुरा नहीं थी मैंने उससे बस एक सच्चे मित्र की तरह गले लगाया ,और उसका  हाथ  हाथ पकड़ कर मैं bed room में चली गयी,क्यूंकि हाल में मेरे दोस्तों ने फुल volume पर म्यूजिक लगाया हुआ था और मैं स्वप्निल को सब कुछ बताना चाहती थी की मैंने आज क्या क्या acheive किया, उसे bed पर बैठा के मैं उसके लिए beer और कुछ खाने का सामान ले आयी ,और मैंने खुद ही दरवाज़े को बंद कर दिया क्यूंकि गांव की आवाज़ बहुत तेज़ थी , मैं भी bed पर बैठ गयी और उसे अपने awards और prizes के बारे में बताने लगी वह बहुत खुश हुआ और मेरे हाथ पकड़ कर बोला मैं जनता हूँ तुम beer नहीं पीती पर आज तो बनती है not for  me just for the winning moment , मैं पहली बार  उसे मना नहीं कर पायी और फिर मैंने beer की बोतल हाथ में ले पीना शुरू किया मैं एक ही बोतल लायी थी इसलिए मैंने उसे पूरा पि लिया और उसके लिए बोतल लाने बहार गयी बहार सबके हाथ में बोतले थी ,सब मस्त थे मैंने देखा की अभी भी बहुत बोतले बची है ,सो पांच बोतले उठा के मैं अंदर आ गयी, और स्वप्निल को एक बोतल दे दी ,खुद को मज़बूत और mordern दिखने के लिए मैंने फिर एक बोतल खोली और पीना शुरू कर दिया  और  फिर दूसरी ,तीसरी और चौथी ,मेरे होश खो रहे थे मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था स्वप्निल मेरे बहुत पास था वो मुझे अपनी तरफ खींच रहा था ,उसके हाथ मेरे शरीर पर मुझे महसूस हो रहे थे पर मैं कुछ भी नहीं कर पा रही थी पर वो अनुभव मरे  लिए नया था  ,और शायद मैं उसे मना नहीं करना चाहती थी ,कुछ  ही देर में मेरे होश पूरी तरह खो गए हुए मुझे कुछ भी याद नहीं की क्या हुआ ,सीधे सुबह मेरी आंख खुली चारो तरफ मेरे दोएत सो रहे थे पर स्वप्निल कही नहीं था ,खैर मैंने सबको जगाया घर की सफाई की और फिर सब के जाने के बाद नहा कर सो गयी ,मेरा पूरा शरीर बेइंतेहा दर्द कर रहा था ,मुझे लगा की सब बियर की वजह से है ,
अगले दिन से रूटीन लाइफ शुरू हो गयी ,पर कुछ दिनों के बाद मुझे कुछ ानीद सा लगने लगा ,मैं खुद को बहुत कमज़ोर सा महसूस करती और मुझे हर समय vomiting  जैसा लगता ,दोस्तों ने कहा पार्टी के दिन जयदा बियर पीने के कारण ये सब हो रहा है , मैंने भी डर के कारण माँ को कुछ नहीं बताया ,पर दोस्तों के कहने पर  अगले महीने चेकउप के लिए गयी ,जहा जो बात डॉक्टर ने मुझसे कही वो सुन के मैं जैसे पत्थर की मूर्ति बन गयी ,उन्होंने कहा ,you are pregnant ,मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया,मैं वापस आ गयी और पार्टी के दिन हुयी सारी  घटनाओ को याद करने लगी ,मैंने तुरंत स्वप्निल को फ़ोन किया और उसे बताया की डॉक्टर ने क्या बोला  स्वप्निल ने सारी बातो से तुरंत इंकार कर दिया और,बोला  की मैं तुम जैसी लड़कियों से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता मुझे दुबारा कॉल मत करना ,
मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था , मैने सोचा की मुझे तुरंत माँ को बताना होगा,जबकि मुझे पता था की मेरी माँ ने मुझे अकेले ही बड़ी मुश्किल से पाला था और मुझे वो सब दिया था जो शायद उसे कभी भी ना मिला होगा ,
मैं तुरंत ही माँ के पास चली गयी मैंने सोचा मेरी माँ मुझसे बहुत नाराज़ होगी पर ऐसा नहीं हुआ मेरी माँ ने मुझे गले से लगाया और बोली डरो नहीं मैं सब ठीक कर दूंगी , मैंने माँ को गले से लगा लिया। पर कोई ज़ोर ज़ोर से मुझे हिला रहा था और मेरा नाम पुकार रहा था ,मैंने आंखे खोली तो देखा मेरी सहेली पुनीता मेरे पास है ,मेरे सारे दोस्त मेरे सामने है ,उन्होंने मुझे बताया की किस तरह मैंने कल बहुत पी ली थी और वो सभी पूरी रात मेरी देख भाल कर रहे थे और स्वप्निल मेरे साथ कुछ गलत करने की कोशिश कर रहा था जिसे उन्होंने वहां  से बाहर भगा दिया था ,


ओह!मैं सपना देख रही थी सब कुछ ठीक था ,वह सब कुछ जो हो सकता था कुछ भी नहीं हुआ था ,और मैं हमेशा के लिए सीख गयी थी की मुझे खुद को किस तरह खुद को control  में रखना है ,और माँ के विश्वास को बचना है.

Friday, 22 March 2019

mere pita shrabi hai
नमस्ते दोस्तों , मेरा नाम सुमिता है , और मेरे पिता alcohalic  है  ,आप ये मत सोचिये की मैं, यहाँ आपके साथ कोई शराब पी कर , मार पीट करने वाली घटना  या अनुभव बाटना चाहती हु , नहीं दोस्तों मेरी कहानी , इन सबसे  अलग और अनोखी है , मैंने अपने जीवन में अपने पिता से अच्छा और, प्यार करने वाला व्यक्ति नहीं देखा  है , वो एक बहुत ही ख्याल रखने वाले और, परिवार के लिए ही जीने वाले व्यक्ति हैं , और शायद परिवार के लिए इतना सेंसटिव होना ही, उनके alcohalic  होने का कारण है।
दोस्तों बारह साल तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था , मेरे माता पिता दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते थे ,,मैं अपने आपको संसार की सबसे खुश नसीब लड़की समझती थी ,,मेरे सोचने से पहले ही मेरे माता पिता मेरी इच्छाओ को पूरा कर देते थे,  मेरी माँ बहुत ही खूबसूरत और energetic महिला थी , और पिता सीधे साधे  और शांत , सब कुछ अच्छा था की, एक शाम माँ ने आ कर कहा की उनको उनके लिए कोई और मिल गया है , और वो उसके साथ हमेशा के लिए जा रही है, और वो किसी दूसरे शहर में उसके साथ रहेंगी ,
उन्होंने ना डैड की तरफ देखा और ना ही उनसे कोई बात की ,डैड अजीब नज़रो  लगातार देख रहे थे.
 फिर माँ ने एक अजनबी की  मेरा हाथ पकड़ कर कहा , सुमिता , मैं कोई कोर्ट केस नहीं करना चाहती, क्यूंकि मुझे पता है की ,तुम्हारे डैड से ज्यादा अच्छी तरह से तुंहारी देखभाल कोई नहीं करेगा,और फिर उन्हें तुम्हारी जरुरत भी होगी , मैं तुमसे मिलने आती रहूंगी , तुम यही डैड के साथ रहो , क्यूंकि यही सबके लिए ठीक होगा ,
 दोस्तों , मैं ये समझ नहीं पा रही थी की मेरी माँ ऐसा क्यों कर रही है , , मेरी खुद की माँ ने मुझे धोखा दिया है, वह कैसे ये कर सकती है , एक माँ अपने बच्चे को कैसे छोड़ सकती है , मैं कैसे खुद को समझाऊ  की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती, पर मुझे खुद को ये समझाना ही था की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,
दूसरी तरफ मेरे बेचारे डैड ,वह बहुत ही डिप्रेस्ड थे , हर समय उदास  और दुखी रहते हसना तो जैसे वो भूल ही गए थे , कितना मुश्किल होता होगा उन्हें खुद को समझाना, की जिस पत्नी को वो इतना प्यार करते थे ,वो बिना कारण उन्हें छोड़  के किसी और के साथ गर्व से चली गयी।
उन्होंने फिर रोज़ शाम मुझ से इज़ाज़त ले  के को वोडका के दो छोटे पैग   पिने शुरू किये , उन्होंने कहा ,बेटी मुझे मत रोको इसे पीने से मुझे थोड़ी हिम्मत मिलती है , मुझे पता था मेरे डैड माँ को बहुत प्यार करते थे , सो उनके दुःख को समझते हुए सो मैं उन्हें मना ना कर सकी , और शायद यही मेरी बड़ी भूल थी , मेरे डैड की एक ही कमज़ोरी थी वह बहुत दृढ़ इच्छा शक्ति  के स्वामी नहीं थे , और मैं , ऐ ये सब समझने के लिए बहुत छोटी थी , जबतक मेरी समझ में आया , बहुत देर हो गयी थी और डैड के दो पैग दो से चार चार से आठ और आठ से सोलह बन गए थे ,  पीते -पीते आराम कुर्सी पर ही सो जाते थे , और मैं उन्हें किसी तरह बिस्तर तक पहुँचती थी ,पर अब उनका पीना उनके काम पर भी असर करने लगा था , मैंने उन्हें समझाया की डैड आप खुद को इतना अकेला और कमज़ोर ना समझिये , मैं हमेशा आपके साथ हूँ , और अगर आपको प्रॉब्लम है भी तो कोई मेडिसिन ले लीजिये , और सो जाइये इतना पीना ठीक नहीं , तो उन्होंने हामी में सर हिलाया और मुझे लगा, की अब वो depresion  से बहार आ जायेंगे ,पर अब स्थिति और भी बदतर हो गयी वो मुझ से डरने लगे और घर के बदले बाहर पीने लगे
इतना ही नहीं उन्हें बाहर कुछ सस्ते बार और नीच किस्म के शराबी दोस्त भी मिल गए, जो दिन भर मेरे पिता के पैसो से पीते और फिर उन्हें माँ के बारे में नुक्ताचीनी कर के, पीने को मज़बूर कर देते और उन्हें  बेचारा महसूस कराते।
घर आने पर वो मुझ से रोज़ प्रॉमिस करते, की वो अब नहीं पिएंगे पर वो उन्हें पूरा नहीं कर पाते, वो रोज़  गिड़गिड़ाते हुए  मुझसे माफ़ी मांगते ,पर अगले दिन फिर वही होता , स्थिति पहले से भी खराब हो गयी थी ,वो अब इतना पी लेते थे की ,  वो लड़खड़ाते हुए या घुटनो के बल घर में आते थे , कभी - कभी घर आना भी भूल जाते , तब मैं उन्हें ढूंढ  कर घर लाती ,कभी उनके चहरे पर इधर उधर गिरने के कारण हुए जख्मो  के निशान होते ,पर वो आज भी पहले जैसे ही थे, वे  मुझे प्यार करते  माफ़ी मांगते और सो जाते।
मेरे पिता जहा होते उनको वहां  से लाना , मुझ जैसी  किशोर लड़की के लिए कोई साधरण बात नहीं थी ,कई बार मैं अपने साथ बैट  ले के जाती , उनके दोस्त मुझसे डरते थे ,
मैं खुद को बहादुर दिखाने की बहुत कोशिश करती, पर मेरे जैसी लड़की के लिए भी ये बहुत मुश्किल था,
एक बार जब डैड नहीं आये, तो मैं उन्हें ढूढ़ने गयी , डैड एक बार में थे ,और एक लम्बा चौड़ा  आदमी उन्हें मार- मार  कर पैसे माग  रहा था, डैड पूरी तरफ बेहोश थे , मैंने उस आदमी का हाथ पकड़ लिया और कहा मेरे पास पैसे नहीं है , और जाने कैसे डैड को घर ले आयी , मेरे लिए, ये मेरी उम्र और हिम्मत की सीमा से बहुत था, मैं अपनी जिंदगी इस तरह नहीं गुजार सकती थी , सलिए मैंने माँ के पा जाने का निर्णय लिया , ये सुनते ही मेरे पिता मुझे एक बहुत ही डरे हुए और हारे हुए इंसान की तरह देखने लगे , और उन्हें ऐसा देख कर बहुत दुःख हुआ , मैं  ज़ोर ज़ोर से रोने लगी , मेरे डैड ने मुझे कभी इस तरह रोते  हुए नहीं देखा था , उन्होंने निर्णय किया की वो शराब को हाथ भी नहीं लगाएंगे , उन्होंने अपनी सारी  शराब की बोतले फेक दी ,और ऑफिस भी गए, अगले दिन मेरा पन्द्रहवा जन्म,दिन था , मैंने सोचा अब मैं कुछ दिन और डैड  के साथ रहूंगी , उस दिन के बाद डैड ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया, वो समय से ऑफिस जाते मेरे साथ समय बिताते ,और खुश रहते उनका विशवास वापस आ गया था  वो हर समय मुझसे बीते वक़्त के लिए माफ़ी मांगते ,हमारी जिंदगी वापस आ गयी थी , हमारी ख़ुशी वापस आ  गयी थी , मेरे डैड हमेशा के लिए वापस आ गए थे।
 आज मैं एक डॉक्टर हूँ और मुझे ब्रेन सर्जरी के लिए अवार्ड भी मिला है और ये सब  मेरे डैडी के प्यार का नतीजा है , मेरी हिम्मत ने मुझे मेरे पिता नामशा के लिए वापस दे दिए  थे,