its society ,and this is me
Saturday, 25 May 2019
पहचान
मेरे माता पिता मेरे भाई को मुझसे ज्यादा प्यार करते है।
मेरे प्यारे दोस्तों, मेरा या अनुभव शायद आपको अजीब लगे ,पर ये अनुभव मेरे लिए लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि इसके दवारा ही मुझे जिंदगी में रिश्तो की पहचान करना आया है , अपनी कमजोरी का ज्ञान हुआ है ,
और खुद को समझने का मौका भी मिला है।
ये बात उस समय की है जब मैं मात्र 7 साल की थी , माँ ने बताया की वो मेरे लिए एक भाई लानेवाली है, क्यूंकि मैं अकेली हूँ , और मेरी देखभाल और सबसे रक्षा करने के लिए मुझे एक वीर पुरुष चाहिए , वो मेरा रक्षक ताउम्र के ले लिए सिर्फ मेरा होगा और मुझे , मेरे भाई के रूप में मिलेगा , जो मेरी हर बात मानेगा , मैं बहुत खुश हो गयी , और अपनी हर उस सहेली के बारे में सोचने लगी जो अपने घर में आराम से अपने भाई के साथ खेलती थी , और जिन्हे किसी दोस्त की जरुरत नहीं थी , मैं बस अपने भाई के आने का इंतज़ार करने लगी , और फिर धीरे धीरे वह समय भी आ गया जब मेरा भाई इस दुनिया में आ गया..
माँ हॉस्पिटल में थी ,पापा बहुत खुश थे दादी, चाचा, चाची और मेरे सभी जानने पहचान ने वाले लोग भी बहुत खुश थे , भाई के आने की पार्टी मांगी जा रही थी , और मैं समझ नहीं पा रही मेरे भाई के आने से भला इन्हे इतनी ख़ुशी क्यों है ? किसी को मेरा ख्याल भी नहीं था दादी ,पापा,चाचा सब मेरे भाई को घर में कहा रखना है ,उसके लिए क्या क्या चाहिए ?सब इसी सोच में थे , आज किसी को रोज़ की तरह ना मेरे खाने का और न ही, मेरे टिफ़िन , मेरे स्कूल कि कोई चिंता थी , जैसे मैं हूँ ही नहीं ,
वैसे तो मुझे स्कूल से छुट्टी लेने पर मेरे माता पिता बहुत नाराज़ होते , पर आज पापा आये और बिना मेरी तरफ देखे बोले , तुम आज छुट्टी ले कर घर में ही रहो , मुझे भाई के पास जाना है , और माँ को घर लाना है , मैंने सर हिलाया , पापा ने मेरे से कुछ भी नहीं पूछा की , मैंने कुछ खाया या नहीं मैं क्यों उदास हूँ ? ये सोचंने का भी किसी को समय नहीं था, और मैं सोच रही थी की की माँ ने ये कैसा भाई मुझे दिया है ,जिसके आते ही सब मुझे भूल कर उसी की चिंता में लग गए थे। ना जाने क्यों मुझे भाई का आना अचछा नहीं लगा। शाम को माँ भाई को ले के आ गयी , मैं सब भूल के बहुत खुश हो गयी और उसके छोटे- छोटे हाथ पैर सब कुछ देख कर मुझे लगा शायद , ये भी कोई माँ- पापा का लाया कोई खिलौना है , जिसे मैं जैसे चाहो खेल सकती हूँ , आखिर इससे पहले भी तो सब कुछ मेरे लिए ही तो लाते थे , मैंने अपने भाई का हाथ पकड़ लिया की माँ ज़ोर से चिल्लाई ,अरे दूर रहो उससे , छूना नहीं पहले हाथ धो कर आओ , मैं हैरान हो गयी और माँ के पास जाने लगी ,सब चिल्लाये दूर रहो माँ के पास मत जाना , माँ का ओपरेशन हुआ है , मैं दूर बैठ गयी , और देखने लगी सब उस भाई को ही प्यार कर रहे थे माँ भी मुझे भूल गयी थी , पापा शाम को भाई के लिए पालना लाये , और मेरे लिए कुछ भी नहीं बस मेरे पास आ कर बोले अब खुश हो ना भाई आ गया। मैं कुछ भी ना बोल पायी और , मुझे भाई के आने में ख़ुशी की कोई वजह भी नज़र ना आयी , इसी तरह 2 साल बीत गए और वो भी चलने लगा , और फिर धीरे -धीरे स्कूल भी जाने लगा , वैसे तो वो बहुत ही प्यारा और छोटा सा बच्चा था पर , मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं आता , माँ उसे मेरी हर चीज़ दे देती , और अब मेरी जगह माँ के पास भी वही सोता था , उसे कोई नहीं डाँटता वो मेरी हर चीज़ खराब करता , और अगर मैं उसे ज़रा भी छूती तो सब मुझे डाँटने लगते , भाई को ले माँ पापा ज़्यदातर हॉस्पिटल के चक्कर ही काटते रहते ,ना उन्हें मेरी parents meet याद रहती ना ही annual day ,.
भाई अब 6 साल का हो गया था ,वो मेरे पास आने की या मुझसे बात करने की कोशिश करता, पर मुझे वो बिलकुल भी पसंद ना था , क्यूंकि उसकी वजह से मेरे माँ पापा सब मुझसे दूर हो गए थे , पर मेरे चेहरे पर आये गुस्से को देख बस दूर से मुझे देखता। ,
पापा और माँ ने निर्णय लिया की भाई की देखभाल के कारण वो मुझे समय नहीं दे पा रहे है ,इसलिए मुझे हॉस्टल में डाल देना चाहिए , मुझे पूरा विश्वास था की क्यूंकि , मेरे माता पिता मुझसे ज्यादा मेरे भाई को प्यार करते है और दूसरे मैं लड़की हूँ इसलिए ,मेरे माता पिता मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे है , मेरी माँ जो मुझसे कभी दूर नहीं होना चाहती थी , ने मेरे लाख मिन्नतें करने पर भी मुझे हॉस्टल भेज दिया। , माँ पापा कभी मुझसे मिलने नहीं आये मैं ही छुट्टियों में घर आती , और माँ पापा को भाई को ले कर हॉस्पिटल के चककर लगते देखा करती ,मेरा 15वा जन्मदिन आ रहा था , पापा ने मुझसे वादा किया था की , वो मुझे लेडीज साइकिल ला कर देंगे , मैं बहुत खुश थी ,पर जन्मदिन की सुबह ही माँ ने कहा की दो दिन बाद भाई का ओप्रशन है ,क्यूंकि उसके दिल में छेद है , इसलिए इस जन्मदिन पर मेरी साइकिल नहीं आ पायेगी।
मैं बहुत रोई पर मैंने देखा की मेरा भाई चुपचाप मुझे देख रहा है , मैंने भाई के ओप्रशन के बारे में कुछ भी नहीं पूछा , मैंने अगले दिन ही जाने का फैसला कर लिया , माँ बोली भाई के ओप्रशन के लिए रुक जाओ , तो मैंने गुस्से और नफरत से कहा मेरा कोई भाई नहीं है , मुझे कोई भाई नहीं चाहिए मैं कल चली जाउंगी , मेरा भाई तब भी मुझे देख रहा था , मेरी नफरत ने उसे कभी मेरे पास नहीं आने दिया , सुबह होते ही मैं हॉस्टल वापस चली गयी.
हॉस्टल पहुंच कर जब मैंने अपना बैग देखा तो उसमे एक पत्र था , मेरे छोटे भाई का पत्र , मैं हैरान हो गयी , उसमे लिखा था:
"प्यारी दीदी , मेरे कारण आपको बड़ा दुःख हुआ ,पर दीदी मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ ,और आपको इतना उदास नहीं देख सकता , मैं आपको हमेशा खुश रखने के लिए स्वस्थ होना चाहता हूँ , मुझे ओप्रशन से बहुत डर लगता है , डॉक्टर अंकल ने कहा की , जन्म से ही मेरे दिल में छेद है , अगर मैं ओप्रशन करवा लू तो आपको हमेशा खुश रख सकूंगा , दीदी मैं ओप्रशन के लिए त्यार हूँ ,पर अगर मैं वापस घर ना आ सका ,तो आपको ये कैसे पता चलेगा की , मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ , और हाँ मैंने आपके कमरे में आपके लिए एक तोहफा भी रखा है , शायद आपको पसंद आये , दीदी ये मेरे 7 जन्मदिनों तक बचाये हुए पैसो से खरीदा है , मुझे पता है आप मुझसे नराज़ है , पर इसे जरूर स्वीकार कीजियेगा ,.
आपका भाई।
दोस्तों , मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था ,ऐसा कैसे हो सकता था , मैं इतनी स्वार्थी कैसे हो सकती थी , माँ पापा का दुःख भाई की तकलीफ मुझे किसी का भी एहसास नहीं था उफ़ !की मुझे अपने परिवार में हो रही इतनी बड़ी घटना के बारे में भी नहीं पता , मैं अगली बस से ही घर पहुंची भाई हॉस्पिटल में मौत से खेल रहा था , माँ पापा का बुरा हाल था , जब मैंने भाई का कमरा खुला थो वह वही साइकिल थी, जिसे मैं लेना चाहती थी,साइकिल पे लिखा था मेरी दीदी के लिए हुए बड़ा सा SORRY भी । मैं उस साइकिल से चिपक कर बहुत रोई मुझे बस मेरा भाई चाहिए था।
मैं हॉस्पिटल पहुंची भाई ICU था अभी होश नहीं आया था मैं बस रोये जा रही थी आज मुझे माँ ,पापा, साइकिल ,खाना ,खिलोने कुछ भी नहीं चाहिए था बस मुझे मेरा भाई चाहिए था।
कुछ देर बाद भाई होश में आ गया मैं उसे देखने अंदर गयी पहली बार भाई को ध्यान से देखा बिलकुल मेरा ही प्रतिरूप, उसके चारो तरफ TUBE लगे हुए थे , और वो मेरी तरफ देख रहा था उदास आँखों से , मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया , और रो पड़ी मुझे मेरा भाई मिल गया था , और वो उस दर्द में भी मुस्कुरा उठा ,जल्दी ही हम लोग भाई को ले कर घर वापस आ गये ,दोस्तों, आज माता पिता का ही नहीं , मेरा भाई मेरी भी जिंदगी है ,और मैं समझ गयी हु की माता पिता हर बच्चे को सामान प्यार करते है। माता पिता ने मुझे उस दुःख से मुझे दूर करने के लिए हॉस्टल भेजा था, आज मैं मेरे माता पिता और मेरा भाई इन सभी से अपने रिश्तो की गंभीरता को जान गयी हूँ।
मेरे माता पिता मेरे भाई को मुझसे ज्यादा प्यार करते है।
मेरे प्यारे दोस्तों, मेरा या अनुभव शायद आपको अजीब लगे ,पर ये अनुभव मेरे लिए लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि इसके दवारा ही मुझे जिंदगी में रिश्तो की पहचान करना आया है , अपनी कमजोरी का ज्ञान हुआ है ,
और खुद को समझने का मौका भी मिला है।
ये बात उस समय की है जब मैं मात्र 7 साल की थी , माँ ने बताया की वो मेरे लिए एक भाई लानेवाली है, क्यूंकि मैं अकेली हूँ , और मेरी देखभाल और सबसे रक्षा करने के लिए मुझे एक वीर पुरुष चाहिए , वो मेरा रक्षक ताउम्र के ले लिए सिर्फ मेरा होगा और मुझे , मेरे भाई के रूप में मिलेगा , जो मेरी हर बात मानेगा , मैं बहुत खुश हो गयी , और अपनी हर उस सहेली के बारे में सोचने लगी जो अपने घर में आराम से अपने भाई के साथ खेलती थी , और जिन्हे किसी दोस्त की जरुरत नहीं थी , मैं बस अपने भाई के आने का इंतज़ार करने लगी , और फिर धीरे धीरे वह समय भी आ गया जब मेरा भाई इस दुनिया में आ गया..
माँ हॉस्पिटल में थी ,पापा बहुत खुश थे दादी, चाचा, चाची और मेरे सभी जानने पहचान ने वाले लोग भी बहुत खुश थे , भाई के आने की पार्टी मांगी जा रही थी , और मैं समझ नहीं पा रही मेरे भाई के आने से भला इन्हे इतनी ख़ुशी क्यों है ? किसी को मेरा ख्याल भी नहीं था दादी ,पापा,चाचा सब मेरे भाई को घर में कहा रखना है ,उसके लिए क्या क्या चाहिए ?सब इसी सोच में थे , आज किसी को रोज़ की तरह ना मेरे खाने का और न ही, मेरे टिफ़िन , मेरे स्कूल कि कोई चिंता थी , जैसे मैं हूँ ही नहीं ,
वैसे तो मुझे स्कूल से छुट्टी लेने पर मेरे माता पिता बहुत नाराज़ होते , पर आज पापा आये और बिना मेरी तरफ देखे बोले , तुम आज छुट्टी ले कर घर में ही रहो , मुझे भाई के पास जाना है , और माँ को घर लाना है , मैंने सर हिलाया , पापा ने मेरे से कुछ भी नहीं पूछा की , मैंने कुछ खाया या नहीं मैं क्यों उदास हूँ ? ये सोचंने का भी किसी को समय नहीं था, और मैं सोच रही थी की की माँ ने ये कैसा भाई मुझे दिया है ,जिसके आते ही सब मुझे भूल कर उसी की चिंता में लग गए थे। ना जाने क्यों मुझे भाई का आना अचछा नहीं लगा। शाम को माँ भाई को ले के आ गयी , मैं सब भूल के बहुत खुश हो गयी और उसके छोटे- छोटे हाथ पैर सब कुछ देख कर मुझे लगा शायद , ये भी कोई माँ- पापा का लाया कोई खिलौना है , जिसे मैं जैसे चाहो खेल सकती हूँ , आखिर इससे पहले भी तो सब कुछ मेरे लिए ही तो लाते थे , मैंने अपने भाई का हाथ पकड़ लिया की माँ ज़ोर से चिल्लाई ,अरे दूर रहो उससे , छूना नहीं पहले हाथ धो कर आओ , मैं हैरान हो गयी और माँ के पास जाने लगी ,सब चिल्लाये दूर रहो माँ के पास मत जाना , माँ का ओपरेशन हुआ है , मैं दूर बैठ गयी , और देखने लगी सब उस भाई को ही प्यार कर रहे थे माँ भी मुझे भूल गयी थी , पापा शाम को भाई के लिए पालना लाये , और मेरे लिए कुछ भी नहीं बस मेरे पास आ कर बोले अब खुश हो ना भाई आ गया। मैं कुछ भी ना बोल पायी और , मुझे भाई के आने में ख़ुशी की कोई वजह भी नज़र ना आयी , इसी तरह 2 साल बीत गए और वो भी चलने लगा , और फिर धीरे -धीरे स्कूल भी जाने लगा , वैसे तो वो बहुत ही प्यारा और छोटा सा बच्चा था पर , मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं आता , माँ उसे मेरी हर चीज़ दे देती , और अब मेरी जगह माँ के पास भी वही सोता था , उसे कोई नहीं डाँटता वो मेरी हर चीज़ खराब करता , और अगर मैं उसे ज़रा भी छूती तो सब मुझे डाँटने लगते , भाई को ले माँ पापा ज़्यदातर हॉस्पिटल के चक्कर ही काटते रहते ,ना उन्हें मेरी parents meet याद रहती ना ही annual day ,.
भाई अब 6 साल का हो गया था ,वो मेरे पास आने की या मुझसे बात करने की कोशिश करता, पर मुझे वो बिलकुल भी पसंद ना था , क्यूंकि उसकी वजह से मेरे माँ पापा सब मुझसे दूर हो गए थे , पर मेरे चेहरे पर आये गुस्से को देख बस दूर से मुझे देखता। ,
पापा और माँ ने निर्णय लिया की भाई की देखभाल के कारण वो मुझे समय नहीं दे पा रहे है ,इसलिए मुझे हॉस्टल में डाल देना चाहिए , मुझे पूरा विश्वास था की क्यूंकि , मेरे माता पिता मुझसे ज्यादा मेरे भाई को प्यार करते है और दूसरे मैं लड़की हूँ इसलिए ,मेरे माता पिता मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे है , मेरी माँ जो मुझसे कभी दूर नहीं होना चाहती थी , ने मेरे लाख मिन्नतें करने पर भी मुझे हॉस्टल भेज दिया। , माँ पापा कभी मुझसे मिलने नहीं आये मैं ही छुट्टियों में घर आती , और माँ पापा को भाई को ले कर हॉस्पिटल के चककर लगते देखा करती ,मेरा 15वा जन्मदिन आ रहा था , पापा ने मुझसे वादा किया था की , वो मुझे लेडीज साइकिल ला कर देंगे , मैं बहुत खुश थी ,पर जन्मदिन की सुबह ही माँ ने कहा की दो दिन बाद भाई का ओप्रशन है ,क्यूंकि उसके दिल में छेद है , इसलिए इस जन्मदिन पर मेरी साइकिल नहीं आ पायेगी।
मैं बहुत रोई पर मैंने देखा की मेरा भाई चुपचाप मुझे देख रहा है , मैंने भाई के ओप्रशन के बारे में कुछ भी नहीं पूछा , मैंने अगले दिन ही जाने का फैसला कर लिया , माँ बोली भाई के ओप्रशन के लिए रुक जाओ , तो मैंने गुस्से और नफरत से कहा मेरा कोई भाई नहीं है , मुझे कोई भाई नहीं चाहिए मैं कल चली जाउंगी , मेरा भाई तब भी मुझे देख रहा था , मेरी नफरत ने उसे कभी मेरे पास नहीं आने दिया , सुबह होते ही मैं हॉस्टल वापस चली गयी.
हॉस्टल पहुंच कर जब मैंने अपना बैग देखा तो उसमे एक पत्र था , मेरे छोटे भाई का पत्र , मैं हैरान हो गयी , उसमे लिखा था:
"प्यारी दीदी , मेरे कारण आपको बड़ा दुःख हुआ ,पर दीदी मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ ,और आपको इतना उदास नहीं देख सकता , मैं आपको हमेशा खुश रखने के लिए स्वस्थ होना चाहता हूँ , मुझे ओप्रशन से बहुत डर लगता है , डॉक्टर अंकल ने कहा की , जन्म से ही मेरे दिल में छेद है , अगर मैं ओप्रशन करवा लू तो आपको हमेशा खुश रख सकूंगा , दीदी मैं ओप्रशन के लिए त्यार हूँ ,पर अगर मैं वापस घर ना आ सका ,तो आपको ये कैसे पता चलेगा की , मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ , और हाँ मैंने आपके कमरे में आपके लिए एक तोहफा भी रखा है , शायद आपको पसंद आये , दीदी ये मेरे 7 जन्मदिनों तक बचाये हुए पैसो से खरीदा है , मुझे पता है आप मुझसे नराज़ है , पर इसे जरूर स्वीकार कीजियेगा ,.
आपका भाई।
दोस्तों , मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था ,ऐसा कैसे हो सकता था , मैं इतनी स्वार्थी कैसे हो सकती थी , माँ पापा का दुःख भाई की तकलीफ मुझे किसी का भी एहसास नहीं था उफ़ !की मुझे अपने परिवार में हो रही इतनी बड़ी घटना के बारे में भी नहीं पता , मैं अगली बस से ही घर पहुंची भाई हॉस्पिटल में मौत से खेल रहा था , माँ पापा का बुरा हाल था , जब मैंने भाई का कमरा खुला थो वह वही साइकिल थी, जिसे मैं लेना चाहती थी,साइकिल पे लिखा था मेरी दीदी के लिए हुए बड़ा सा SORRY भी । मैं उस साइकिल से चिपक कर बहुत रोई मुझे बस मेरा भाई चाहिए था।
मैं हॉस्पिटल पहुंची भाई ICU था अभी होश नहीं आया था मैं बस रोये जा रही थी आज मुझे माँ ,पापा, साइकिल ,खाना ,खिलोने कुछ भी नहीं चाहिए था बस मुझे मेरा भाई चाहिए था।
कुछ देर बाद भाई होश में आ गया मैं उसे देखने अंदर गयी पहली बार भाई को ध्यान से देखा बिलकुल मेरा ही प्रतिरूप, उसके चारो तरफ TUBE लगे हुए थे , और वो मेरी तरफ देख रहा था उदास आँखों से , मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया , और रो पड़ी मुझे मेरा भाई मिल गया था , और वो उस दर्द में भी मुस्कुरा उठा ,जल्दी ही हम लोग भाई को ले कर घर वापस आ गये ,दोस्तों, आज माता पिता का ही नहीं , मेरा भाई मेरी भी जिंदगी है ,और मैं समझ गयी हु की माता पिता हर बच्चे को सामान प्यार करते है। माता पिता ने मुझे उस दुःख से मुझे दूर करने के लिए हॉस्टल भेजा था, आज मैं मेरे माता पिता और मेरा भाई इन सभी से अपने रिश्तो की गंभीरता को जान गयी हूँ।
विराम
नमस्ते दोस्तों मैं समीरा हूँ , मैं यहाँ आपको अपनी जिंदगी के अनुभवों से कुछ सिखाना चाहती हूँ, मेरी कहानी बहुत ही उदासी और मानसिक मंथन से बनी कहानी है , वैसे ये इतना जरूरी नहीं की मैं अपनी जिंदगी की इतनी व्यक्तिगत बात को सब को बताऊ , पर मुझे लगता है की मेरे ये अनुभव, मेरे उन दोस्तों को काम आएंगे जो इसी तरह के हालात से गुज़र रहे है.
तो मैं अपनी कहानी शुरू करती हूँ, आज से लगभग पच्चीस साल पहले मेरे माता- पिता का विवाह हुआ ,वे दोनों ही एकदूसरे को बहुत प्यार करते थे ,यहाँ तक की लोग उन्हें made for each other कहा करते थे।
मेरे पिता एक बड़े बिज़नेस मैन थे , वे बड़े ही दयालु और सभ्य व्यक्ति थे , उनके चेहरे पर सदैव एक मधुर मुस्कान रहा करती थी , जो किसी को भी सहज अपनी तरफ खींच सकती थी.
दूसरी तरफ मेरी माँ पूरी तरह से विपरीत थी ,वे बहुत ही दबंग और खुले दिल की स्त्री थी , वो किसी को सहज ही इज़्ज़त नहीं देती थी , आपसी बोलचाल में भी असभ्य और रूखे शब्दों का इस्तेमाल करती थी ,जहा मेरे पिता मुस्कुरा कर काम चला लेते , वहाँ वे बिलकुल ही उलटी तौर पर ज़ोर -ज़ोर से ठहाके लगा कर हॅसनेवाली और तरह -तरह के सकैण्डल मैं घिरी रहनेवाली महिला थी।
उन दोनों के बीच सिर्फ एक चीज़ थी जो समान थी , वह थी मैं उन दोनों की एकलौती संतान , वह दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते और मैं भी उन दोनों को बहुत प्यार करती थी , लेकिन मेरा भी सभी सामान्य बच्चो की तरह माँ से कुछ ज्यादा ही जुड़ाव था ,क्यूंकि जब भी कोई मेरे से यह बचकाना प्रश्न जिसे हर बच्चे से पूछा जाता है की मैं किसे ज्यादा प्यार करती हूँ ? मैं बिना एक पल भी गवाए और कुछ भी सोचे बिना गर्व से कहती मां !.पर इसका मतलब ये बिलकुल नहीं था की मैं अपने पिता के करीब नहीं थी।
मेरे 15 वे जन्मदिन के समय मैं बहुत ही खुश थी, सब कुछ बिलकुल सामान्य सा ही था की, मेरे मेरे माता -पिता ने मुझे बात करने के लिए बुलाया , और कहा की वह मुझसे कोई जरुरी बात करना चाहते है , मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा और मैं खुद को बहुत कमज़ोर महसूस करने लगी , मेरे मन में अनजानी सैकड़ो शंकाये आने लगी, पसीना भी आने लगा, पर मेरे माता पिता का ज़रा सा ध्यान भी मेरी तरफ नहीं था , मुझे वो दोनों ही बहुत अजनबी से लग रहे थे की ,तभी मैंने वो सुना जिसका मुझे डर था, और जो किसी भी बच्चे के लिए असहनीय है
उन्होंने कहा:" सुनो बेटी हम दोनों ने निर्णय लिया है की हम दोनों अब अलग हो जाए , अब तुम भी बड़ी हो चुकी हो और अपना भला बुरा समझ के अपने फैसले ले सकती हो ,हमे पूरा विश्वास है की तुम समझ सकोगी ,
मेरे हाथ पैर काँप रहे थे मेरा दिमाग सुन्न हो गया था और तेज़ पसीना आ रहा था पर ,मैंने समझदार होने का नाटक करते हुए अपने सर को हिला दिया , और उन दोनों से ये प्रश्न भी नहीं पूछा की उनको मुझसे मेरे माँ बाप को अलग करने का ये अधिकार किसने दिया , मैं सोचने लगी की इतने दिनों तक हम सब एक दूसरे के साथ ही थे फिर भी मैं कैसे नहीं समझ पायी की मेरा परिवार इस तरह टूटने की कगार पर खड़ा है ,अचानक ही घर की खुशियों का इंद्रधनुष खतरनाक तूफान में बदल गया। घर की हंसी की जगह ख़ामोशी और षडयंत्रो ने ले ली।
तलाक़ की प्रक्रिया न्याय के अनुसार ही हुयी माँ पापा बिना किसी लड़ाई झगड़े के चुप चाप अलग हो गए सब कुछ बराबर बराबर बाँट दिया गया ,पर जो नहीं बंट पाया ,वो थी मैं जिसे उन दोनों में से कोई भी छोड़ना नहीं चाहता था , माँ पापा दोनों ही मुझे खुश रखने की कोशिशों में लग गए ताकि मैं उनकी तरफ आने का मन बना लू ,जो मुझे मेरे पहले माँ पापा जैसा नहीं लगता था ,ऐसा लगता उनका प्यार और उपहार सिर्फ मुझे साथ रखने के लिए लुभाने की कोशिशे है ,
मेरी इस दुविधा को देख मेरे दादा दादी ने कहा “प्यारी समीरा तुम एक समझदार लड़की हो और बड़ी भी तुम माँ पा के बीच किसी एक को चुन लो और ख़ुशी से रहो। “
मेरा मन मुझसे कहने लगा की मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्लाऊं और पुछु :
“माँ पापा मैं कोई चीज़ नहीं आपकी अपनी वही समीरा हूँ ,एक जीती जगती बच्ची ,अपने मुझसे एक बार पूछा तो होता भला आप दोनों मेसे एक मैं कैसे चुन सकुंगी ,,क्या सच मच मैं इतनी बड़ी हूँ की मैं माँ या पापा के बीच किसी एक को चुन सकती हूँ ,”
हमारा घर एक नर्क में बदल चूका था जहा हम अब भी साथ ही रहते थे मैंने देखा ,मेरी माँ मुझे साथ रखने के लिए कुछ भी करने को तैयार है ,माँ मुझे तरह -तरह के महंगे उपहार खरीद कर देती ,मुझे बहुत ही अजीब लगता की जो माँ मुझे हर चीज़ से रोकती और अच्छा बुरा समझती रहती ,आज बस मुझे आकर्षित करने के लिए माँ मुझे अपने साथ ब्यूटी स्पा ,रेस्टोरंट पब सब जगह साथ ले जाती और मेरे साथ माँ नहीं बल्कि बेस्ट फ्रेंड होने की एक्टिंग करती ,मेरी माँ कही खो गयी थी , मुझे अच्छा नहीं लगता ,मगर फिर भी मैं कुछ नहीं बोलती पर ,जो बात मुझे बिलकुल पसंद नहीं थी वह यह की, वो हर समय कहती मेरे पापा एक अच्छे इंसान नहीं है,मैं अपने पापा को बहुत प्यार करती हूँ ,मेरी माँ ही बार बार मुझे मेरे पिता के बुरे होने की खबर देती ,
दूसरी तरफ मेरे पिता कुछ भी नहीं कहते वो हमेशा मेरी तरफ प्राथ्नापूर्ण नज़रो से देखते रहते और बहुत अकेले नज़र आते ,और मुझे अपने पिता का ये प्यार और बेबसी भी एक्टिंग सी लगने लगी थी ।
एक दिन मैंने उन दोनों को बात करते हुए सुना मेरी माँ मेरे पिता को बड़े ही कड़े शब्दों में धमकी दे रही थी और ब्लैकमेल कर रही थी उन्होंने पिता जी से कहा " तुम समीरा को स्वतंर छोड़ दो तो मैं कोर्ट की इजाजत से कभी -कभी तुम्हे समीरा को देखने दूंगी वरना सारी उम्र तुम उसे नहीं देख पाओगे ,मैं तुम्हारे ऊपर हिंसक होने का आरोप लगा दूंगी और तुम्हारे ऊपर एक खराब हिंसक और बुरे आदमी होने का आरोप लगवा दूगी और लीगली भी उसको कभी देखने नहीं दूंगी , वैसे भी तुम जानते हो वो सिर्फ मुझे ही चुनेगीं।"
मेरे पापा बहुत उदास हो गए और कुछ नहीं बोले उन्होंने सर हिला दिया वह कैसे भी सिर्फ मुझे देखना चाहते थे, माँ का ये रूप देख कर मुझे बड़ा बहुत दुःख हुआ और मैं बहुत रोई और मैंने उसी समय अपना निर्णय भी ले लिया। अगले दिन कोर्ट में जब माँ पुरे विश्वास से मुझे लेने आयी ,मैंने कोर्ट में कहा की, मैं सिर्फ अपने पिता के साथ रहना चाहती हूँ.
मेरी माँ के चेहरे का दुःख और अपमान से रंग उड़ गया और वो मेरी तरफ घृणा से देखने लगी ,मेरे पापा की ख़ुशी और आश्चर्य का कोई ठिकाना ही ना था ,वो सबको धन्यवाद दे कर ख़ुशी से रो पड़े।
अब माँ ने हमारा घर छोड़ दिया था और मैं पापा के साथ रहने लगी , मेरे मन में माँ के बारे में बहुत बुरे- बुरे ख्याल आते ,और उनकी मेरे पिता से कही गयी बाते भी हमेशा दिमाग मैं घूमती, मैं अपनी माँ से ,दिल से दूर होती जा रही थी, वो मुझे किसी खतरनाक विलेन की तरह नज़र आती , माँ मुझसे कभी -कभी मिलने आती थी और हमेशा मुझे जताती की मैं कितनी बड़ी स्वार्थी और दगाबाज़ हूँ , मुझे समझ नहीं आता की उन्हें कैसे समझाऊ की मैं नहीं वही ऐसी हैं पर मैं चुप रहती ,दूसरी तरफ मेरे पापा बहुत खुश है, हमेशा मेरी इच्छा का ध्यान रखते है मुझे समय देते है अच्छे बुरे का ज्ञान देते है मेरे लिए गिफ्ट लाते है, और सब से बड़ी बात उन्होंने मुझे ढेर सा फ्रीडम भी दिया जो किसी भी पंद्रह साल की लड़की को मिलना संभव नहीं है।
पर एक बार मैंने ,इस फ्रीडम को दुरूपयोग करने का सोचा और पापा से कहा की एक ओवर नाईट म्यूजिक पार्टी है ,जिसमे मैं अपने मित्रो के साथ पूरी रात बाहर बिताना चाहती हूँ , पर मेरे पापा नहीं माने ,मैं बहुत चीखी ,चिल्लाई और जब कोई नतीजा नहीं निकला तो मैंने वो किया जो मैं सोच भी नहीं सकती थी , मैंने पहली बार अपने पापा को ब्लैक मेल किया , और मैं बोली की अगर आपने मुझे परमिशन नहीं दी, तो मैं तुरंत माँ को फ़ोन कर माँ के पास चली जाउंगी, पापा के फेस पर फिर मायूसी के भाव आ गए, और वो बोले ठीक है , तुम जाओ ,जो ठीक लगे करो, और चुप चाप मेरे कमरे से चले गए।
और मैं सोचने लगी की मैंने, उनको कितना बड़ा शॉक दिया है, मैंने अपने डैड को ब्लैकमेल किया था, और मुझे बहुत शर्मिंदगी लग रही थी, जिस तरह मेरी माँ ने उस शाम पापा को ब्लैकमेल किया था ,आज उसी तरह अपनी पसंद की चीज़ के लिए मैंने भी, पापा को ब्लैकमेल किया था , और तभी ये भी अब मुझे समझ में आ गया की ,मेरी माँ भी मुझे पाने के लिए बहुत परेशान थी इसीलिए उसने ऐसा कहा था ,और वो वो कोई बुरी औरत या विलन नहीं थी ये समझ में आते ही मैं बहुत खुश हुयी मुझे खोयी हुयी माँ मिल गयी थी , और फिर मैं अपनी माँ के नजदीक आ गयी , मैं समझ गयी की वो कोई खलनायिका नहीं है ,बस मुझे पाने के लिए उसने ऐसा बोला, मेरे दोनों माता- पिता मुझसे प्यार करते है ,और मैं ग्रेट पेरेंट्स की प्यारी बेटी हूँ जो अलग होने के बाद भी मेरी इज़्ज़त करते है और मुझे खुश देखना चाहते है।
तो दोस्तों इस कहानी से आप उस झटके से बाहर आ सकते है,जो हमे माता- पिता के तलाक़ लेने से लगता है,
आप समझ जायेंगे की भले ही वो दोनों एक दूसरे के साथ खुश न हो और कोई दूसरे रस्ते चुन ले ,पर आप के दोनों माता पिता आपको बहुत प्यार करते है, और फिर आप दोनों की परिस्थितियों को समझ के दोनों के साथ आराम से रह सकते है.
नमस्ते दोस्तों मैं समीरा हूँ , मैं यहाँ आपको अपनी जिंदगी के अनुभवों से कुछ सिखाना चाहती हूँ, मेरी कहानी बहुत ही उदासी और मानसिक मंथन से बनी कहानी है , वैसे ये इतना जरूरी नहीं की मैं अपनी जिंदगी की इतनी व्यक्तिगत बात को सब को बताऊ , पर मुझे लगता है की मेरे ये अनुभव, मेरे उन दोस्तों को काम आएंगे जो इसी तरह के हालात से गुज़र रहे है.
तो मैं अपनी कहानी शुरू करती हूँ, आज से लगभग पच्चीस साल पहले मेरे माता- पिता का विवाह हुआ ,वे दोनों ही एकदूसरे को बहुत प्यार करते थे ,यहाँ तक की लोग उन्हें made for each other कहा करते थे।
मेरे पिता एक बड़े बिज़नेस मैन थे , वे बड़े ही दयालु और सभ्य व्यक्ति थे , उनके चेहरे पर सदैव एक मधुर मुस्कान रहा करती थी , जो किसी को भी सहज अपनी तरफ खींच सकती थी.
दूसरी तरफ मेरी माँ पूरी तरह से विपरीत थी ,वे बहुत ही दबंग और खुले दिल की स्त्री थी , वो किसी को सहज ही इज़्ज़त नहीं देती थी , आपसी बोलचाल में भी असभ्य और रूखे शब्दों का इस्तेमाल करती थी ,जहा मेरे पिता मुस्कुरा कर काम चला लेते , वहाँ वे बिलकुल ही उलटी तौर पर ज़ोर -ज़ोर से ठहाके लगा कर हॅसनेवाली और तरह -तरह के सकैण्डल मैं घिरी रहनेवाली महिला थी।
उन दोनों के बीच सिर्फ एक चीज़ थी जो समान थी , वह थी मैं उन दोनों की एकलौती संतान , वह दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते और मैं भी उन दोनों को बहुत प्यार करती थी , लेकिन मेरा भी सभी सामान्य बच्चो की तरह माँ से कुछ ज्यादा ही जुड़ाव था ,क्यूंकि जब भी कोई मेरे से यह बचकाना प्रश्न जिसे हर बच्चे से पूछा जाता है की मैं किसे ज्यादा प्यार करती हूँ ? मैं बिना एक पल भी गवाए और कुछ भी सोचे बिना गर्व से कहती मां !.पर इसका मतलब ये बिलकुल नहीं था की मैं अपने पिता के करीब नहीं थी।
मेरे 15 वे जन्मदिन के समय मैं बहुत ही खुश थी, सब कुछ बिलकुल सामान्य सा ही था की, मेरे मेरे माता -पिता ने मुझे बात करने के लिए बुलाया , और कहा की वह मुझसे कोई जरुरी बात करना चाहते है , मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा और मैं खुद को बहुत कमज़ोर महसूस करने लगी , मेरे मन में अनजानी सैकड़ो शंकाये आने लगी, पसीना भी आने लगा, पर मेरे माता पिता का ज़रा सा ध्यान भी मेरी तरफ नहीं था , मुझे वो दोनों ही बहुत अजनबी से लग रहे थे की ,तभी मैंने वो सुना जिसका मुझे डर था, और जो किसी भी बच्चे के लिए असहनीय है
उन्होंने कहा:" सुनो बेटी हम दोनों ने निर्णय लिया है की हम दोनों अब अलग हो जाए , अब तुम भी बड़ी हो चुकी हो और अपना भला बुरा समझ के अपने फैसले ले सकती हो ,हमे पूरा विश्वास है की तुम समझ सकोगी ,
मेरे हाथ पैर काँप रहे थे मेरा दिमाग सुन्न हो गया था और तेज़ पसीना आ रहा था पर ,मैंने समझदार होने का नाटक करते हुए अपने सर को हिला दिया , और उन दोनों से ये प्रश्न भी नहीं पूछा की उनको मुझसे मेरे माँ बाप को अलग करने का ये अधिकार किसने दिया , मैं सोचने लगी की इतने दिनों तक हम सब एक दूसरे के साथ ही थे फिर भी मैं कैसे नहीं समझ पायी की मेरा परिवार इस तरह टूटने की कगार पर खड़ा है ,अचानक ही घर की खुशियों का इंद्रधनुष खतरनाक तूफान में बदल गया। घर की हंसी की जगह ख़ामोशी और षडयंत्रो ने ले ली।
तलाक़ की प्रक्रिया न्याय के अनुसार ही हुयी माँ पापा बिना किसी लड़ाई झगड़े के चुप चाप अलग हो गए सब कुछ बराबर बराबर बाँट दिया गया ,पर जो नहीं बंट पाया ,वो थी मैं जिसे उन दोनों में से कोई भी छोड़ना नहीं चाहता था , माँ पापा दोनों ही मुझे खुश रखने की कोशिशों में लग गए ताकि मैं उनकी तरफ आने का मन बना लू ,जो मुझे मेरे पहले माँ पापा जैसा नहीं लगता था ,ऐसा लगता उनका प्यार और उपहार सिर्फ मुझे साथ रखने के लिए लुभाने की कोशिशे है ,
मेरी इस दुविधा को देख मेरे दादा दादी ने कहा “प्यारी समीरा तुम एक समझदार लड़की हो और बड़ी भी तुम माँ पा के बीच किसी एक को चुन लो और ख़ुशी से रहो। “
मेरा मन मुझसे कहने लगा की मैं ज़ोर ज़ोर से चिल्लाऊं और पुछु :
“माँ पापा मैं कोई चीज़ नहीं आपकी अपनी वही समीरा हूँ ,एक जीती जगती बच्ची ,अपने मुझसे एक बार पूछा तो होता भला आप दोनों मेसे एक मैं कैसे चुन सकुंगी ,,क्या सच मच मैं इतनी बड़ी हूँ की मैं माँ या पापा के बीच किसी एक को चुन सकती हूँ ,”
हमारा घर एक नर्क में बदल चूका था जहा हम अब भी साथ ही रहते थे मैंने देखा ,मेरी माँ मुझे साथ रखने के लिए कुछ भी करने को तैयार है ,माँ मुझे तरह -तरह के महंगे उपहार खरीद कर देती ,मुझे बहुत ही अजीब लगता की जो माँ मुझे हर चीज़ से रोकती और अच्छा बुरा समझती रहती ,आज बस मुझे आकर्षित करने के लिए माँ मुझे अपने साथ ब्यूटी स्पा ,रेस्टोरंट पब सब जगह साथ ले जाती और मेरे साथ माँ नहीं बल्कि बेस्ट फ्रेंड होने की एक्टिंग करती ,मेरी माँ कही खो गयी थी , मुझे अच्छा नहीं लगता ,मगर फिर भी मैं कुछ नहीं बोलती पर ,जो बात मुझे बिलकुल पसंद नहीं थी वह यह की, वो हर समय कहती मेरे पापा एक अच्छे इंसान नहीं है,मैं अपने पापा को बहुत प्यार करती हूँ ,मेरी माँ ही बार बार मुझे मेरे पिता के बुरे होने की खबर देती ,
दूसरी तरफ मेरे पिता कुछ भी नहीं कहते वो हमेशा मेरी तरफ प्राथ्नापूर्ण नज़रो से देखते रहते और बहुत अकेले नज़र आते ,और मुझे अपने पिता का ये प्यार और बेबसी भी एक्टिंग सी लगने लगी थी ।
एक दिन मैंने उन दोनों को बात करते हुए सुना मेरी माँ मेरे पिता को बड़े ही कड़े शब्दों में धमकी दे रही थी और ब्लैकमेल कर रही थी उन्होंने पिता जी से कहा " तुम समीरा को स्वतंर छोड़ दो तो मैं कोर्ट की इजाजत से कभी -कभी तुम्हे समीरा को देखने दूंगी वरना सारी उम्र तुम उसे नहीं देख पाओगे ,मैं तुम्हारे ऊपर हिंसक होने का आरोप लगा दूंगी और तुम्हारे ऊपर एक खराब हिंसक और बुरे आदमी होने का आरोप लगवा दूगी और लीगली भी उसको कभी देखने नहीं दूंगी , वैसे भी तुम जानते हो वो सिर्फ मुझे ही चुनेगीं।"
मेरे पापा बहुत उदास हो गए और कुछ नहीं बोले उन्होंने सर हिला दिया वह कैसे भी सिर्फ मुझे देखना चाहते थे, माँ का ये रूप देख कर मुझे बड़ा बहुत दुःख हुआ और मैं बहुत रोई और मैंने उसी समय अपना निर्णय भी ले लिया। अगले दिन कोर्ट में जब माँ पुरे विश्वास से मुझे लेने आयी ,मैंने कोर्ट में कहा की, मैं सिर्फ अपने पिता के साथ रहना चाहती हूँ.
मेरी माँ के चेहरे का दुःख और अपमान से रंग उड़ गया और वो मेरी तरफ घृणा से देखने लगी ,मेरे पापा की ख़ुशी और आश्चर्य का कोई ठिकाना ही ना था ,वो सबको धन्यवाद दे कर ख़ुशी से रो पड़े।
अब माँ ने हमारा घर छोड़ दिया था और मैं पापा के साथ रहने लगी , मेरे मन में माँ के बारे में बहुत बुरे- बुरे ख्याल आते ,और उनकी मेरे पिता से कही गयी बाते भी हमेशा दिमाग मैं घूमती, मैं अपनी माँ से ,दिल से दूर होती जा रही थी, वो मुझे किसी खतरनाक विलेन की तरह नज़र आती , माँ मुझसे कभी -कभी मिलने आती थी और हमेशा मुझे जताती की मैं कितनी बड़ी स्वार्थी और दगाबाज़ हूँ , मुझे समझ नहीं आता की उन्हें कैसे समझाऊ की मैं नहीं वही ऐसी हैं पर मैं चुप रहती ,दूसरी तरफ मेरे पापा बहुत खुश है, हमेशा मेरी इच्छा का ध्यान रखते है मुझे समय देते है अच्छे बुरे का ज्ञान देते है मेरे लिए गिफ्ट लाते है, और सब से बड़ी बात उन्होंने मुझे ढेर सा फ्रीडम भी दिया जो किसी भी पंद्रह साल की लड़की को मिलना संभव नहीं है।
पर एक बार मैंने ,इस फ्रीडम को दुरूपयोग करने का सोचा और पापा से कहा की एक ओवर नाईट म्यूजिक पार्टी है ,जिसमे मैं अपने मित्रो के साथ पूरी रात बाहर बिताना चाहती हूँ , पर मेरे पापा नहीं माने ,मैं बहुत चीखी ,चिल्लाई और जब कोई नतीजा नहीं निकला तो मैंने वो किया जो मैं सोच भी नहीं सकती थी , मैंने पहली बार अपने पापा को ब्लैक मेल किया , और मैं बोली की अगर आपने मुझे परमिशन नहीं दी, तो मैं तुरंत माँ को फ़ोन कर माँ के पास चली जाउंगी, पापा के फेस पर फिर मायूसी के भाव आ गए, और वो बोले ठीक है , तुम जाओ ,जो ठीक लगे करो, और चुप चाप मेरे कमरे से चले गए।
और मैं सोचने लगी की मैंने, उनको कितना बड़ा शॉक दिया है, मैंने अपने डैड को ब्लैकमेल किया था, और मुझे बहुत शर्मिंदगी लग रही थी, जिस तरह मेरी माँ ने उस शाम पापा को ब्लैकमेल किया था ,आज उसी तरह अपनी पसंद की चीज़ के लिए मैंने भी, पापा को ब्लैकमेल किया था , और तभी ये भी अब मुझे समझ में आ गया की ,मेरी माँ भी मुझे पाने के लिए बहुत परेशान थी इसीलिए उसने ऐसा कहा था ,और वो वो कोई बुरी औरत या विलन नहीं थी ये समझ में आते ही मैं बहुत खुश हुयी मुझे खोयी हुयी माँ मिल गयी थी , और फिर मैं अपनी माँ के नजदीक आ गयी , मैं समझ गयी की वो कोई खलनायिका नहीं है ,बस मुझे पाने के लिए उसने ऐसा बोला, मेरे दोनों माता- पिता मुझसे प्यार करते है ,और मैं ग्रेट पेरेंट्स की प्यारी बेटी हूँ जो अलग होने के बाद भी मेरी इज़्ज़त करते है और मुझे खुश देखना चाहते है।
तो दोस्तों इस कहानी से आप उस झटके से बाहर आ सकते है,जो हमे माता- पिता के तलाक़ लेने से लगता है,
आप समझ जायेंगे की भले ही वो दोनों एक दूसरे के साथ खुश न हो और कोई दूसरे रस्ते चुन ले ,पर आप के दोनों माता पिता आपको बहुत प्यार करते है, और फिर आप दोनों की परिस्थितियों को समझ के दोनों के साथ आराम से रह सकते है.
नमस्ते दोस्तों मेरा नाम सुमिता है ,और मेरे पिता शराबी है , नहीं ये मत सोचिये की मैं यहाँ आपके साथ कोई शराब पी कर मार पीट करने वाली कहानी और अनुभव बाटना चाहती हु , नहीं दोस्तों मेरी कहानी इन सबसे अलग और अनोखी है , मैंने अपने जीवन में अपने पिता से अच्छा और प्यार करने वाला व्यक्ति नहीं देखा है , वो एक बहुत ही ख्याल रखने वाले और परिवार के लिए ही जीने वाले व्यक्ति हैं , और शायद परिवार के लिए इतना सेंसटिव होना ही उनके alcohalic होने का कारण है।
दोस्तों बारह साल तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था , मेरे माता पिता दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते थे ,मैं अपने आपको संसार की सबसे खुश नसीब लड़की समझती थी ,मेरे सोचने से पहले ही मेरे माता पिता मेरी इच्छाओ को पूरा कर देते थे , मेरी माँ
बहुत ही खूबसूरत और energetic महिला थी , और पिता सीधे साधे और शांत ,सब कुछ अच्छा था की एक शाम माँ ने आ कर कहा की उनको उनके लिए कोई और मिल गया है , और वो उसके साथ हमेशा के लिए जा रही है और वो किसी दूसरे शहर में उसके साथ रहेंगी
फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर कहा सुमिता मैं कोई कोर्ट केस नहीं करना चाहती क्यूंकि मुझे पता है की तुम्हारे डैड से ज्यादा अच्छी तरह से तुंहारी देखभाल कोई नहीं करेगा,और फिर उन्हें तुम्हारी जरुरत भी होगी ,मैं तुमसे मिलने आती रहूंगी ,तुम यही दादी के साथ रहो ,क्यूंकि यही सबके लिए ठीक होगा ,
आपको लगता है की मैं आपको, बस यही बताना चाहती हूँ की मेरी खुद की माँ ने मुझे धोखा दिया है,वह कैसे ये वदेसीडे कर सकती है ,एक माँ अपने बच्चे को कैसे छोड़ सकती है ,मैं कैसे समझू की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,पर मुझे खुद को ये समझाना ही था की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,
दूसरी तरफ मेरे बेचारे डैड वह बहुत ही डिप्रेस्ड थे ,हर समय उड़स और दुखी रहते हसना तो जैसे वो भूल ही गए थे ,कितना मुश्किल होता होगा उन्हें खुद को समझाना की जिस पत्नी को वो इतना प्यार करते थे वो बिना कारण उन्हें छोड़ के किसी और के साथ गर्व से चली गयी ,
उन्होंने रोज़ शाम को वोडका के दो छोटे पैग मुझ से इज़ाज़त ले के पिने शुरू किये ,उन्होंने कहा ,बेटी मुझे मत रोको मुझे थोड़ी हिम्मत मिलती है ,मुझे पता था मेरे डैड माँ को बहुत प्यार करते थे ,सो मैं उन्हें मना ना कर सकी ,और शायद यही मेरी बड़ी भूल थी ,मेरे डैड की एक ही कमज़ोरी थी वह बहुत स्ट्रांग महस्थिति के स्वामी नहीं थे ,और मैं ऐ ये सब समझने के लिए बहुत छोटी थी , जबतक मेरी समझ में आये बहुत देर हो गयी थी डैड के दो पैग दो से चार चार से आठ और आठ से सोलह बन गए थे ,वो पीते पीते आराम कुर्सी पर ही सो जाते थे और मैं उन्हें किसी तरह बीएड तक पहुँचती थी ,पर अब उनका पीना उनके काम पर भी असर करने लगा था ,मैंने उन्हें समझाया की डैड आप खुद को इतना अकेला और कमज़ोर ना समझिये और अगर आपको प्रॉब्लम है तो कोई मेडिसिन ले लीजिये और सो जाइये इतना पीना ठीक नहीं ,तो उन्होंने हामी में सर हिलाया और मुझे लगा की अब वो depresion से बहार आ जायेंगे ,पर अब स्थिति और भी बदतर हो गयी वो मुझ से डरने लगे और घर के बदले बाहर पीने लगे
इतना ही नहीं उन्हें बहार कुछ सस्ते बार और नीच किस्म के दोस्त भी मिल गए जो दिन भर मेरे पिता के पैसो से पीते और उन्हें बहुत बेचारा महसूस कराते।
वो मुझसे से रोज़ प्रॉमिस करते की वो अब नहीं पिएंगे पर वो उन्हें पूरा नहीं कर पाते वो रट गिड़गिड़ाते मुझसे माफ़ी मांगते पर अगले दिन फिर वही होता , स्थिति पहले से भी खराब हो गयी थी वो इतना पी लेते थे की ,अब वो लड़खड़ाते हुए या घुटनो के बल घर में आते थे, कभी कभी घर आना भी भूल जाते तब मैं उन्हें ढूंढ कर घर लाती ,कभी उनके चहरे पर इधर उधर गिरने के कारण हुए जख्म के निशान होते ,पर वो आज भी पहले जैसे ही थे मुझे प्यार करतये माफ़ी मांगते और सो जाते।
मेरे पिता जहा होते उनको वहां से लाना मुझ जैसी किशोर लड़की के लिए कोई साधरण बात नहीं थी ,कई बार मैं अपने साथ बात ले के जाती ,उनके दोस्त मुझसे डरते थे ,
मई खुद को बहदुर दिखने की बहुत कोशिश करती पर मेरे जैसी लड़की के लिए भी ये बहुत मुश्किल था,
एक बार जब डैड नहीं आये तो मैं उन्हें ढूढ़ने गयी ,डैड एक बार में थे और एक लम्बा छोड़ा आदमी उन्हें मार कर पैसे मान रहा था डैड पूरी तरफ बेहोश थे ,मैंने उस आदमी का हाथ पकड़ लिया और कहा मेरे पास पैसे नहीं है ,और जाने कैसे डैड को घर ले आयी , मेरे लिए ये मेरी उम्र और हिम्मत की सीमा से बहुत था, मैं अपनी जिंदगी इस तरह नहीं गुजार सकती थी ,इसलिए मैंने माँ के पा जाने का निर्णय लिया ,ये सुनते ही मेरे पिता मुझे एक बहुत ही डरे हुए और हारे हुए इंसान की तरह देखने लगे ,और मैं ज़ोर ज़ोर से रोने लगी , मेरे डैड ने मुझे कभी रट हुए नहीं देखा था उन्होंने निर्णय किया की वो शराब को हाथ भी नहीं लगाएंगे ,उन्होंने अपनी साड़ी शराब की बोतले फेक दी और ऑफिस भी गए अगले दिन मेरा पन्द्रहवा जन्म,दिन था ,मैंने सोचा अब मैं कुछ दिन और डैड के साथ रहूंगी,ओस दिन के बाद डैड ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया वो समय से ऑफिस जाते मेरे साथ समय बिताते और खुश रहते उनका विशवास वापस आ गया था ,वो हर समय मुझसे बीते वक़्त के लिए माफ़ी मांगते ,हमारी जिंदगी वापस आ गयी थी
आज मैं एक डॉक्टर हूँ और मुझे ब्रेन सर्जरी के लिए अवार्ड भी मिला है और ये सब मेरे डैडी के प्यार का नतीजा है ,मेरी हिम्मत ने मुझे मेरे पिता वापस दे दिए है।
दोस्तों बारह साल तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था , मेरे माता पिता दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते थे ,मैं अपने आपको संसार की सबसे खुश नसीब लड़की समझती थी ,मेरे सोचने से पहले ही मेरे माता पिता मेरी इच्छाओ को पूरा कर देते थे , मेरी माँ
फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर कहा सुमिता मैं कोई कोर्ट केस नहीं करना चाहती क्यूंकि मुझे पता है की तुम्हारे डैड से ज्यादा अच्छी तरह से तुंहारी देखभाल कोई नहीं करेगा,और फिर उन्हें तुम्हारी जरुरत भी होगी ,मैं तुमसे मिलने आती रहूंगी ,तुम यही दादी के साथ रहो ,क्यूंकि यही सबके लिए ठीक होगा ,
आपको लगता है की मैं आपको, बस यही बताना चाहती हूँ की मेरी खुद की माँ ने मुझे धोखा दिया है,वह कैसे ये वदेसीडे कर सकती है ,एक माँ अपने बच्चे को कैसे छोड़ सकती है ,मैं कैसे समझू की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,पर मुझे खुद को ये समझाना ही था की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,
दूसरी तरफ मेरे बेचारे डैड वह बहुत ही डिप्रेस्ड थे ,हर समय उड़स और दुखी रहते हसना तो जैसे वो भूल ही गए थे ,कितना मुश्किल होता होगा उन्हें खुद को समझाना की जिस पत्नी को वो इतना प्यार करते थे वो बिना कारण उन्हें छोड़ के किसी और के साथ गर्व से चली गयी ,
उन्होंने रोज़ शाम को वोडका के दो छोटे पैग मुझ से इज़ाज़त ले के पिने शुरू किये ,उन्होंने कहा ,बेटी मुझे मत रोको मुझे थोड़ी हिम्मत मिलती है ,मुझे पता था मेरे डैड माँ को बहुत प्यार करते थे ,सो मैं उन्हें मना ना कर सकी ,और शायद यही मेरी बड़ी भूल थी ,मेरे डैड की एक ही कमज़ोरी थी वह बहुत स्ट्रांग महस्थिति के स्वामी नहीं थे ,और मैं ऐ ये सब समझने के लिए बहुत छोटी थी , जबतक मेरी समझ में आये बहुत देर हो गयी थी डैड के दो पैग दो से चार चार से आठ और आठ से सोलह बन गए थे ,वो पीते पीते आराम कुर्सी पर ही सो जाते थे और मैं उन्हें किसी तरह बीएड तक पहुँचती थी ,पर अब उनका पीना उनके काम पर भी असर करने लगा था ,मैंने उन्हें समझाया की डैड आप खुद को इतना अकेला और कमज़ोर ना समझिये और अगर आपको प्रॉब्लम है तो कोई मेडिसिन ले लीजिये और सो जाइये इतना पीना ठीक नहीं ,तो उन्होंने हामी में सर हिलाया और मुझे लगा की अब वो depresion से बहार आ जायेंगे ,पर अब स्थिति और भी बदतर हो गयी वो मुझ से डरने लगे और घर के बदले बाहर पीने लगे
इतना ही नहीं उन्हें बहार कुछ सस्ते बार और नीच किस्म के दोस्त भी मिल गए जो दिन भर मेरे पिता के पैसो से पीते और उन्हें बहुत बेचारा महसूस कराते।
वो मुझसे से रोज़ प्रॉमिस करते की वो अब नहीं पिएंगे पर वो उन्हें पूरा नहीं कर पाते वो रट गिड़गिड़ाते मुझसे माफ़ी मांगते पर अगले दिन फिर वही होता , स्थिति पहले से भी खराब हो गयी थी वो इतना पी लेते थे की ,अब वो लड़खड़ाते हुए या घुटनो के बल घर में आते थे, कभी कभी घर आना भी भूल जाते तब मैं उन्हें ढूंढ कर घर लाती ,कभी उनके चहरे पर इधर उधर गिरने के कारण हुए जख्म के निशान होते ,पर वो आज भी पहले जैसे ही थे मुझे प्यार करतये माफ़ी मांगते और सो जाते।
मेरे पिता जहा होते उनको वहां से लाना मुझ जैसी किशोर लड़की के लिए कोई साधरण बात नहीं थी ,कई बार मैं अपने साथ बात ले के जाती ,उनके दोस्त मुझसे डरते थे ,
मई खुद को बहदुर दिखने की बहुत कोशिश करती पर मेरे जैसी लड़की के लिए भी ये बहुत मुश्किल था,
एक बार जब डैड नहीं आये तो मैं उन्हें ढूढ़ने गयी ,डैड एक बार में थे और एक लम्बा छोड़ा आदमी उन्हें मार कर पैसे मान रहा था डैड पूरी तरफ बेहोश थे ,मैंने उस आदमी का हाथ पकड़ लिया और कहा मेरे पास पैसे नहीं है ,और जाने कैसे डैड को घर ले आयी , मेरे लिए ये मेरी उम्र और हिम्मत की सीमा से बहुत था, मैं अपनी जिंदगी इस तरह नहीं गुजार सकती थी ,इसलिए मैंने माँ के पा जाने का निर्णय लिया ,ये सुनते ही मेरे पिता मुझे एक बहुत ही डरे हुए और हारे हुए इंसान की तरह देखने लगे ,और मैं ज़ोर ज़ोर से रोने लगी , मेरे डैड ने मुझे कभी रट हुए नहीं देखा था उन्होंने निर्णय किया की वो शराब को हाथ भी नहीं लगाएंगे ,उन्होंने अपनी साड़ी शराब की बोतले फेक दी और ऑफिस भी गए अगले दिन मेरा पन्द्रहवा जन्म,दिन था ,मैंने सोचा अब मैं कुछ दिन और डैड के साथ रहूंगी,ओस दिन के बाद डैड ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया वो समय से ऑफिस जाते मेरे साथ समय बिताते और खुश रहते उनका विशवास वापस आ गया था ,वो हर समय मुझसे बीते वक़्त के लिए माफ़ी मांगते ,हमारी जिंदगी वापस आ गयी थी
आज मैं एक डॉक्टर हूँ और मुझे ब्रेन सर्जरी के लिए अवार्ड भी मिला है और ये सब मेरे डैडी के प्यार का नतीजा है ,मेरी हिम्मत ने मुझे मेरे पिता वापस दे दिए है।
Monday, 25 March 2019
मेरी और मेंरे कुत्ते की प्रेम कहानी
हेलो मेरे प्यारे दोस्तों मेरा नाम अवंतिका है ,मैं यहाँ आपको अपने जीवनके एक दिल को छू लेने वाले अनुभव को आपसे बाटना चाहती हूँ , ये एक कुत्ते के बारे में है जिसे मैंने मौत के मुँह से बचाया , तो मैं शुरू करती हूँ
एक दिन अपने दोस्तों से मिल कर मैं घर को वापस लौट रही थी , दोस्तो के साथ मुझे समय का कुछ पता ही ना चला ,और मैं काफी लेट हो गयी थी ,सर्दियो के दिन थे इसलिये अँधेरा भी काफी जल्दी हो जाता था,घर तक पहुंचने के दो रस्ते थे एक थोड़ा बड़ा और एक शार्ट कट ,मेरा मन उस दिन शॉर्टकट से जाने को ही कर रहा था ,पर मम्मी ने उस रस्ते से आने के लिए खास तौर पर मना किया था ,क्यूंकि रस्ते के बीच में एक पुराना खाली मकान था और लोगो का मानना था की उस घर भूत रहते है , मेरा इस तरह की चीज़ो पर कोई विश्वास नहीं था, पर माँ के शब्दों का आदर मुझे रोक रहा था, अँधेरा तेज़ी से बढ़ रहा था ,सो मैं दिल कड़ा कर के शार्ट कट से ही घर की तरफ चल पड़ी ,सामने ही वह वीरान पुराना टुटा- फूटा सा घर था ,जब मैं उस के सामने से गुज़री तो मुझे किसी के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ी ,मेरे मन में जिज्ञासा हुयी की देखू आखिर ये किस की आवाज है,क्या सच ही अंदर कोई भूत है , मैंने घर के पास जा धूल से भरे खिड़की के कांच को साफ़ किया ,और अंदर झाका , अंदर अँधेरा था पर खिड़की से आती रौशनी के कारण दिख रहा था ,बेसमेन्ट में एक टूटे हुए सोफे पर एक छोटा सा कुत्ते का बच्चा पड़ा हुआ था, और रो रहा था।
मुझे समझ नहीं आया की उस बेचारे को वहां किस ने फेंक दिया ,पर मैं भला उसे इतनी सर्दी में अकेला भूखा और लाचार कैसे छोड़ सकती थी , मैंने अपने पापा को फोन किया और ये सारी बात बताई पर, पापा कुछ सुनने को त्यार ही ना थे, उन्होंने कहा नहीं बिलकुल नहीं ,सीधी घर चली आओ ,और मैं समझ गयी थी की मेरे पापा मुझे इसे बचाने नहीं देंगे , क्यूंकि पापा को जानवरो से सख्त नफरत थी पर ’मैं उसे इस हाल में अकेला नहीं छोड़ सकती थी ,सो मैं उस घर के बसेमेन्ट में गयी ,ताकि उसे बाहर निकल सकू ,वह मुझसे डर रहा था पर थोड़ी ही देर में वह मेरा दोस्त बन गया ,और मैंने उसे उठा कर अपनी जैकेट में रख लिया ,वो अभी भी सर्दी से काँप रहा था मैं उसे ले कर प्रोविसन स्टोर गयी और उसके लिए कुछ खाने का सामान खरीदा ,और घर की तरफ चल पड़ी ,अब मैं उसे बचाने के उपाय सोच रही थी ,
मुझे याद आया घर के पास ही एक छोटा सा शेड था, मैंने उसे वही रख दिया और घर वापस आ गयी ,घर का दरवाजा खोल कर मैंने देखा , मेरे माता पिता गहरी नींद में थे मैं चुप चाप किचन में गयी,और दो बाउल ले कर अपने कमरे में चली गयी और अपनी अलमारी से अपना एक पुराना गरम कंबल और एक पानी की बोतल ले वापस शेड में आ गयी ,
मैने उस पप्पी को खानेके लिए बिस्कुट और पीने के लिए पानी दिया ,पर वो बहुत ही डरा हुआ था, इसलिए कुछ खा नहीं रहा था, मैं उसके पास गयी, उसके सर को सहलाया उसे पुचकारा, तो वो मेरे पास आ गया ,मैं उसे खाना दे कर और कंबल में सुला के वापस आ गयी ,पर पूरी रात मुझे नींद नहीं आयी, और मैं पूरी रात उस अकेले पप्पी के बारे में भी सोचती रही। सुबह होते ही मैं माँ पापा के ऑफ़िस जाने का इंतज़ार करने लगी ,और उनके जाते ही दौड़ती हुयी शेड में चली गयी ,और दरवाज़ा खोलते ही वह छोटा सा पप्पी मेरे पास आ गया ,मुझे बहुत ख़ुशी हुयी , वो एक जर्मन शेफर्ड था, और अपनी गोलगोल आँखों से मुझे प्यार और भरोसे से देख रहा था ,
कई दिन हो गए थे वह पहले से ज्यादा मेरे करीब हो गया था , जब मैं उसे लायी थी, वो सर्दी और भूख से परेशां था पर अब , वह आराम से खा रहा था और पहले से बहुत स्वस्थ हो गया था ,पर अब एक नई परेशानी थी अब उसने भोकना शुरू कर दिया था ,इसलिए मैं बहुत डर गयी थी क्यूंकि ,मेरे माँ पापा को कभी भी वो मिल सकता था ,
इसलिए मैंने अपने दोस्तो से पूछा की क्या किसी को पप्पी चाहिए सब ने हां ही कहा पर ,किसीके भी माता पिता उसे रखने को तैयार ना थे ,
मुझे उसके लिए किसी भी तरह एक ठिकाना ढूढ़ना था ,पर मैं उसे बहुत प्यार करने लगी थी और उसे अपने पास ही रखना चाहती थी ,मैंने उसके लिए एक डॉग टॉय भी ख़रीदा जिसके साथ वो बहुत खेलता,मैं रोज़ रात में माँ पापा के सोने के बाद उसके पास चली जाती और खेल कर वापस आ जाती थी मैं उसे किसी भी हाल में छोड़ना नहीं चाहती थी , अब वह मेरे शेड में आने से बहुत खुश होता और मेरे जाने पर उदास ,आज भी मैं जब उसे छोड़ कर जा रही थी पर वो मुझे जाने देना नहीं चाहता था पर मुझे आना पड़ा और वो ज़ोर ज़ोर से भोकने लगा ,मैं जानती थी आज मेरे माता को पिता को इसके बारे में जरूर पता चल जायेगा ,और यही हुआ , मेरे पिता बहुत ही डिसिप्लिनड और सख्त आदमी थे, उन्होंने मुझे बुलाया और पूछा ,अवंतिका ये क्या हो रहा है ,मैंने कहा मुझे नहीं पता, वह फिर बोले तुम आधी रात को कहा से आ रही हो ?
मैंने सोचा आज मैं डैडी को सब सच बता दूंगी ,डर कर मेरी आँखों से आंसू बह रहे थे पर ,मैंने डैडी को सब बता दिया , ये सुनते ही मेरे dady ज़ोर से बोले जाओ और अभी उसे घर से बाहर फ़ेंक दो ,मेरी आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे, मैं डैडी से बहुत डरती थी ,पर मैंने कहा नहीं मैं ऐसा नहीं करुँगी , तो डैडी ने कहा ठीक है फिर मैं ही उसे बाहर फ़ेंक दूंगा ,और वो शेड की तरफ जाने लगे ,उन्होंने ज़ोर से दरवाज़ा खोला और सामने ही छोटे से पप्पी को देखा ,वह उन्हें अपनी गोल गोल आँखों से देख रहा था और अपनी पूंछ हिला रहा था ,वह उसे ५ सेकंड तक देखते ही रहे ,शायद वह भी वही सोच रहे थे जो मैंने उसे पहली बार देख कर सोचा था ,कुछ देर बाद वो उसे ले कर घर आ गए और मुझसे बोले, ओके अवंतिका तुम इसे तब तक रख सकती हो जब तक इसके लिए कोई अच्छा घर नहीं मिल जाता , तब से अब तक दो साल बीत गए है और वह पप्पी मेरे डैडी का favorite है , डैडी उसे मुझसे ज्यादा प्यार करते हैं और वो भी मुझसे ज्यादा डैडी के पास रहता है।
हेलो मेरे प्यारे दोस्तों मेरा नाम अवंतिका है ,मैं यहाँ आपको अपने जीवनके एक दिल को छू लेने वाले अनुभव को आपसे बाटना चाहती हूँ , ये एक कुत्ते के बारे में है जिसे मैंने मौत के मुँह से बचाया , तो मैं शुरू करती हूँ
एक दिन अपने दोस्तों से मिल कर मैं घर को वापस लौट रही थी , दोस्तो के साथ मुझे समय का कुछ पता ही ना चला ,और मैं काफी लेट हो गयी थी ,सर्दियो के दिन थे इसलिये अँधेरा भी काफी जल्दी हो जाता था,घर तक पहुंचने के दो रस्ते थे एक थोड़ा बड़ा और एक शार्ट कट ,मेरा मन उस दिन शॉर्टकट से जाने को ही कर रहा था ,पर मम्मी ने उस रस्ते से आने के लिए खास तौर पर मना किया था ,क्यूंकि रस्ते के बीच में एक पुराना खाली मकान था और लोगो का मानना था की उस घर भूत रहते है , मेरा इस तरह की चीज़ो पर कोई विश्वास नहीं था, पर माँ के शब्दों का आदर मुझे रोक रहा था, अँधेरा तेज़ी से बढ़ रहा था ,सो मैं दिल कड़ा कर के शार्ट कट से ही घर की तरफ चल पड़ी ,सामने ही वह वीरान पुराना टुटा- फूटा सा घर था ,जब मैं उस के सामने से गुज़री तो मुझे किसी के रोने की आवाज़ सुनाई पड़ी ,मेरे मन में जिज्ञासा हुयी की देखू आखिर ये किस की आवाज है,क्या सच ही अंदर कोई भूत है , मैंने घर के पास जा धूल से भरे खिड़की के कांच को साफ़ किया ,और अंदर झाका , अंदर अँधेरा था पर खिड़की से आती रौशनी के कारण दिख रहा था ,बेसमेन्ट में एक टूटे हुए सोफे पर एक छोटा सा कुत्ते का बच्चा पड़ा हुआ था, और रो रहा था।
मुझे समझ नहीं आया की उस बेचारे को वहां किस ने फेंक दिया ,पर मैं भला उसे इतनी सर्दी में अकेला भूखा और लाचार कैसे छोड़ सकती थी , मैंने अपने पापा को फोन किया और ये सारी बात बताई पर, पापा कुछ सुनने को त्यार ही ना थे, उन्होंने कहा नहीं बिलकुल नहीं ,सीधी घर चली आओ ,और मैं समझ गयी थी की मेरे पापा मुझे इसे बचाने नहीं देंगे , क्यूंकि पापा को जानवरो से सख्त नफरत थी पर ’मैं उसे इस हाल में अकेला नहीं छोड़ सकती थी ,सो मैं उस घर के बसेमेन्ट में गयी ,ताकि उसे बाहर निकल सकू ,वह मुझसे डर रहा था पर थोड़ी ही देर में वह मेरा दोस्त बन गया ,और मैंने उसे उठा कर अपनी जैकेट में रख लिया ,वो अभी भी सर्दी से काँप रहा था मैं उसे ले कर प्रोविसन स्टोर गयी और उसके लिए कुछ खाने का सामान खरीदा ,और घर की तरफ चल पड़ी ,अब मैं उसे बचाने के उपाय सोच रही थी ,
मुझे याद आया घर के पास ही एक छोटा सा शेड था, मैंने उसे वही रख दिया और घर वापस आ गयी ,घर का दरवाजा खोल कर मैंने देखा , मेरे माता पिता गहरी नींद में थे मैं चुप चाप किचन में गयी,और दो बाउल ले कर अपने कमरे में चली गयी और अपनी अलमारी से अपना एक पुराना गरम कंबल और एक पानी की बोतल ले वापस शेड में आ गयी ,
मैने उस पप्पी को खानेके लिए बिस्कुट और पीने के लिए पानी दिया ,पर वो बहुत ही डरा हुआ था, इसलिए कुछ खा नहीं रहा था, मैं उसके पास गयी, उसके सर को सहलाया उसे पुचकारा, तो वो मेरे पास आ गया ,मैं उसे खाना दे कर और कंबल में सुला के वापस आ गयी ,पर पूरी रात मुझे नींद नहीं आयी, और मैं पूरी रात उस अकेले पप्पी के बारे में भी सोचती रही। सुबह होते ही मैं माँ पापा के ऑफ़िस जाने का इंतज़ार करने लगी ,और उनके जाते ही दौड़ती हुयी शेड में चली गयी ,और दरवाज़ा खोलते ही वह छोटा सा पप्पी मेरे पास आ गया ,मुझे बहुत ख़ुशी हुयी , वो एक जर्मन शेफर्ड था, और अपनी गोलगोल आँखों से मुझे प्यार और भरोसे से देख रहा था ,
कई दिन हो गए थे वह पहले से ज्यादा मेरे करीब हो गया था , जब मैं उसे लायी थी, वो सर्दी और भूख से परेशां था पर अब , वह आराम से खा रहा था और पहले से बहुत स्वस्थ हो गया था ,पर अब एक नई परेशानी थी अब उसने भोकना शुरू कर दिया था ,इसलिए मैं बहुत डर गयी थी क्यूंकि ,मेरे माँ पापा को कभी भी वो मिल सकता था ,
इसलिए मैंने अपने दोस्तो से पूछा की क्या किसी को पप्पी चाहिए सब ने हां ही कहा पर ,किसीके भी माता पिता उसे रखने को तैयार ना थे ,
मुझे उसके लिए किसी भी तरह एक ठिकाना ढूढ़ना था ,पर मैं उसे बहुत प्यार करने लगी थी और उसे अपने पास ही रखना चाहती थी ,मैंने उसके लिए एक डॉग टॉय भी ख़रीदा जिसके साथ वो बहुत खेलता,मैं रोज़ रात में माँ पापा के सोने के बाद उसके पास चली जाती और खेल कर वापस आ जाती थी मैं उसे किसी भी हाल में छोड़ना नहीं चाहती थी , अब वह मेरे शेड में आने से बहुत खुश होता और मेरे जाने पर उदास ,आज भी मैं जब उसे छोड़ कर जा रही थी पर वो मुझे जाने देना नहीं चाहता था पर मुझे आना पड़ा और वो ज़ोर ज़ोर से भोकने लगा ,मैं जानती थी आज मेरे माता को पिता को इसके बारे में जरूर पता चल जायेगा ,और यही हुआ , मेरे पिता बहुत ही डिसिप्लिनड और सख्त आदमी थे, उन्होंने मुझे बुलाया और पूछा ,अवंतिका ये क्या हो रहा है ,मैंने कहा मुझे नहीं पता, वह फिर बोले तुम आधी रात को कहा से आ रही हो ?
मैंने सोचा आज मैं डैडी को सब सच बता दूंगी ,डर कर मेरी आँखों से आंसू बह रहे थे पर ,मैंने डैडी को सब बता दिया , ये सुनते ही मेरे dady ज़ोर से बोले जाओ और अभी उसे घर से बाहर फ़ेंक दो ,मेरी आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे, मैं डैडी से बहुत डरती थी ,पर मैंने कहा नहीं मैं ऐसा नहीं करुँगी , तो डैडी ने कहा ठीक है फिर मैं ही उसे बाहर फ़ेंक दूंगा ,और वो शेड की तरफ जाने लगे ,उन्होंने ज़ोर से दरवाज़ा खोला और सामने ही छोटे से पप्पी को देखा ,वह उन्हें अपनी गोल गोल आँखों से देख रहा था और अपनी पूंछ हिला रहा था ,वह उसे ५ सेकंड तक देखते ही रहे ,शायद वह भी वही सोच रहे थे जो मैंने उसे पहली बार देख कर सोचा था ,कुछ देर बाद वो उसे ले कर घर आ गए और मुझसे बोले, ओके अवंतिका तुम इसे तब तक रख सकती हो जब तक इसके लिए कोई अच्छा घर नहीं मिल जाता , तब से अब तक दो साल बीत गए है और वह पप्पी मेरे डैडी का favorite है , डैडी उसे मुझसे ज्यादा प्यार करते हैं और वो भी मुझसे ज्यादा डैडी के पास रहता है।
आज मेरी कक्षा बारहवीं का फेयरवेल डे था ,हम सभी लोग बहुत खुश थे मैं , एक को -एजुकेशन स्कूल में पढ़ती थी, इसलिए लड़के लड़की का भेद भाव ना करते हुए मेरे खास दोस्तों में लड़के- लड़किया सभी शामिल थे ,हम सभी ही बहुत खुश थे ,और अपनी ख़ुशी को खुल कर ज़ाहिर कर रहे थे ,स्कूल की पार्टी खत्म होने के बाद भी हम सभी का मूड अब तक पार्टी सेलिब्रेशन का ही था , पर अब हम स्कूल में ज्यादा देर नहीं रह सकते थे ,मैं आपको बता दू की ,मैं एक सिंगल मदर की बेटी हूँ जो मेरे साथ नहीं रहती थी और मैं एक अप्पर्टमेन्ट में, वन रूम फ्लैट ले के रहती थी ,जो की मेरी मा के अनुसार मेरे लिए बहुत सेफ था,
सभी को पता था की मैं अकेली ही रहती हु, इसलिए सबने बाकी की पार्टी मेरे घर इंजॉय करने का प्लान बनाया जिसे मैंने तुरंत मान लिया ,हम करीब 8 लोग थे जिसमे तीन लड़के और पांच लड़किया थी ,हमने बाजार से बियर की 25 बोतले खरीदी कुछ खाने का सामान लिया और बस चल पड़े , मैं म्यूजिक की शौकीन थी इसलिए मेरे घर में mom का दिया एक music systm भी था , मैं beer नहीं पीती थी पर डांस का जूनून था मुझे ,और फिर आज स्कूल में हुए beauty कॉम्पिटिशन में मुझे मिस ब्यूटीफुल चुना गया था,और इतना ही नहीं gk quiz में भी मुझे first प्राइज मिला था ,और प्रीओन्सिपल ने मुझे ब्यूटी विथ ब्रेन का स्पेशल award भी दिया था सो मैं बहुत खुश थी , मेरे पापा के दोस्त का बेटा स्वप्निल मेरा प्यारा दोस्त था और मैं उससे पसंद भी करती थी ,सो मैंने घर पहुंच के इस party में उससे भी बुला लिया था , हमारी party फुल bloom पे थी मैं आधे घंटे से लगातार नाच रही थी ,की दूर बेल बजी ,दरवाज़ा खोलने पर सामने ही स्वप्निल खड़ा था ,उसे देख कर मैं बहुत खुश हुयी और उसे गले लगा लिया , पर मेरा इरादा बुरा नहीं थी मैंने उससे बस एक सच्चे मित्र की तरह गले लगाया ,और उसका हाथ हाथ पकड़ कर मैं bed room में चली गयी,क्यूंकि हाल में मेरे दोस्तों ने फुल volume पर म्यूजिक लगाया हुआ था और मैं स्वप्निल को सब कुछ बताना चाहती थी की मैंने आज क्या क्या acheive किया, उसे bed पर बैठा के मैं उसके लिए beer और कुछ खाने का सामान ले आयी ,और मैंने खुद ही दरवाज़े को बंद कर दिया क्यूंकि गांव की आवाज़ बहुत तेज़ थी , मैं भी bed पर बैठ गयी और उसे अपने awards और prizes के बारे में बताने लगी वह बहुत खुश हुआ और मेरे हाथ पकड़ कर बोला मैं जनता हूँ तुम beer नहीं पीती पर आज तो बनती है not for me just for the winning moment , मैं पहली बार उसे मना नहीं कर पायी और फिर मैंने beer की बोतल हाथ में ले पीना शुरू किया मैं एक ही बोतल लायी थी इसलिए मैंने उसे पूरा पि लिया और उसके लिए बोतल लाने बहार गयी बहार सबके हाथ में बोतले थी ,सब मस्त थे मैंने देखा की अभी भी बहुत बोतले बची है ,सो पांच बोतले उठा के मैं अंदर आ गयी, और स्वप्निल को एक बोतल दे दी ,खुद को मज़बूत और mordern दिखने के लिए मैंने फिर एक बोतल खोली और पीना शुरू कर दिया और फिर दूसरी ,तीसरी और चौथी ,मेरे होश खो रहे थे मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था स्वप्निल मेरे बहुत पास था वो मुझे अपनी तरफ खींच रहा था ,उसके हाथ मेरे शरीर पर मुझे महसूस हो रहे थे पर मैं कुछ भी नहीं कर पा रही थी पर वो अनुभव मरे लिए नया था ,और शायद मैं उसे मना नहीं करना चाहती थी ,कुछ ही देर में मेरे होश पूरी तरह खो गए हुए मुझे कुछ भी याद नहीं की क्या हुआ ,सीधे सुबह मेरी आंख खुली चारो तरफ मेरे दोएत सो रहे थे पर स्वप्निल कही नहीं था ,खैर मैंने सबको जगाया घर की सफाई की और फिर सब के जाने के बाद नहा कर सो गयी ,मेरा पूरा शरीर बेइंतेहा दर्द कर रहा था ,मुझे लगा की सब बियर की वजह से है ,
अगले दिन से रूटीन लाइफ शुरू हो गयी ,पर कुछ दिनों के बाद मुझे कुछ ानीद सा लगने लगा ,मैं खुद को बहुत कमज़ोर सा महसूस करती और मुझे हर समय vomiting जैसा लगता ,दोस्तों ने कहा पार्टी के दिन जयदा बियर पीने के कारण ये सब हो रहा है , मैंने भी डर के कारण माँ को कुछ नहीं बताया ,पर दोस्तों के कहने पर अगले महीने चेकउप के लिए गयी ,जहा जो बात डॉक्टर ने मुझसे कही वो सुन के मैं जैसे पत्थर की मूर्ति बन गयी ,उन्होंने कहा ,you are pregnant ,मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया,मैं वापस आ गयी और पार्टी के दिन हुयी सारी घटनाओ को याद करने लगी ,मैंने तुरंत स्वप्निल को फ़ोन किया और उसे बताया की डॉक्टर ने क्या बोला स्वप्निल ने सारी बातो से तुरंत इंकार कर दिया और,बोला की मैं तुम जैसी लड़कियों से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता मुझे दुबारा कॉल मत करना ,
मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था , मैने सोचा की मुझे तुरंत माँ को बताना होगा,जबकि मुझे पता था की मेरी माँ ने मुझे अकेले ही बड़ी मुश्किल से पाला था और मुझे वो सब दिया था जो शायद उसे कभी भी ना मिला होगा ,
मैं तुरंत ही माँ के पास चली गयी मैंने सोचा मेरी माँ मुझसे बहुत नाराज़ होगी पर ऐसा नहीं हुआ मेरी माँ ने मुझे गले से लगाया और बोली डरो नहीं मैं सब ठीक कर दूंगी , मैंने माँ को गले से लगा लिया। पर कोई ज़ोर ज़ोर से मुझे हिला रहा था और मेरा नाम पुकार रहा था ,मैंने आंखे खोली तो देखा मेरी सहेली पुनीता मेरे पास है ,मेरे सारे दोस्त मेरे सामने है ,उन्होंने मुझे बताया की किस तरह मैंने कल बहुत पी ली थी और वो सभी पूरी रात मेरी देख भाल कर रहे थे और स्वप्निल मेरे साथ कुछ गलत करने की कोशिश कर रहा था जिसे उन्होंने वहां से बाहर भगा दिया था ,
ओह!मैं सपना देख रही थी सब कुछ ठीक था ,वह सब कुछ जो हो सकता था कुछ भी नहीं हुआ था ,और मैं हमेशा के लिए सीख गयी थी की मुझे खुद को किस तरह खुद को control में रखना है ,और माँ के विश्वास को बचना है.
Friday, 22 March 2019
mere pita shrabi hai
नमस्ते दोस्तों , मेरा नाम सुमिता है , और मेरे पिता alcohalic है ,आप ये मत सोचिये की मैं, यहाँ आपके साथ कोई शराब पी कर , मार पीट करने वाली घटना या अनुभव बाटना चाहती हु , नहीं दोस्तों मेरी कहानी , इन सबसे अलग और अनोखी है , मैंने अपने जीवन में अपने पिता से अच्छा और, प्यार करने वाला व्यक्ति नहीं देखा है , वो एक बहुत ही ख्याल रखने वाले और, परिवार के लिए ही जीने वाले व्यक्ति हैं , और शायद परिवार के लिए इतना सेंसटिव होना ही, उनके alcohalic होने का कारण है।
दोस्तों बारह साल तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था , मेरे माता पिता दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते थे ,,मैं अपने आपको संसार की सबसे खुश नसीब लड़की समझती थी ,,मेरे सोचने से पहले ही मेरे माता पिता मेरी इच्छाओ को पूरा कर देते थे, मेरी माँ बहुत ही खूबसूरत और energetic महिला थी , और पिता सीधे साधे और शांत , सब कुछ अच्छा था की, एक शाम माँ ने आ कर कहा की उनको उनके लिए कोई और मिल गया है , और वो उसके साथ हमेशा के लिए जा रही है, और वो किसी दूसरे शहर में उसके साथ रहेंगी ,
उन्होंने ना डैड की तरफ देखा और ना ही उनसे कोई बात की ,डैड अजीब नज़रो लगातार देख रहे थे.
फिर माँ ने एक अजनबी की मेरा हाथ पकड़ कर कहा , सुमिता , मैं कोई कोर्ट केस नहीं करना चाहती, क्यूंकि मुझे पता है की ,तुम्हारे डैड से ज्यादा अच्छी तरह से तुंहारी देखभाल कोई नहीं करेगा,और फिर उन्हें तुम्हारी जरुरत भी होगी , मैं तुमसे मिलने आती रहूंगी , तुम यही डैड के साथ रहो , क्यूंकि यही सबके लिए ठीक होगा ,
दोस्तों , मैं ये समझ नहीं पा रही थी की मेरी माँ ऐसा क्यों कर रही है , , मेरी खुद की माँ ने मुझे धोखा दिया है, वह कैसे ये कर सकती है , एक माँ अपने बच्चे को कैसे छोड़ सकती है , मैं कैसे खुद को समझाऊ की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती, पर मुझे खुद को ये समझाना ही था की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,
दूसरी तरफ मेरे बेचारे डैड ,वह बहुत ही डिप्रेस्ड थे , हर समय उदास और दुखी रहते हसना तो जैसे वो भूल ही गए थे , कितना मुश्किल होता होगा उन्हें खुद को समझाना, की जिस पत्नी को वो इतना प्यार करते थे ,वो बिना कारण उन्हें छोड़ के किसी और के साथ गर्व से चली गयी।
उन्होंने फिर रोज़ शाम मुझ से इज़ाज़त ले के को वोडका के दो छोटे पैग पिने शुरू किये , उन्होंने कहा ,बेटी मुझे मत रोको इसे पीने से मुझे थोड़ी हिम्मत मिलती है , मुझे पता था मेरे डैड माँ को बहुत प्यार करते थे , सो उनके दुःख को समझते हुए सो मैं उन्हें मना ना कर सकी , और शायद यही मेरी बड़ी भूल थी , मेरे डैड की एक ही कमज़ोरी थी वह बहुत दृढ़ इच्छा शक्ति के स्वामी नहीं थे , और मैं , ऐ ये सब समझने के लिए बहुत छोटी थी , जबतक मेरी समझ में आया , बहुत देर हो गयी थी और डैड के दो पैग दो से चार चार से आठ और आठ से सोलह बन गए थे , पीते -पीते आराम कुर्सी पर ही सो जाते थे , और मैं उन्हें किसी तरह बिस्तर तक पहुँचती थी ,पर अब उनका पीना उनके काम पर भी असर करने लगा था , मैंने उन्हें समझाया की डैड आप खुद को इतना अकेला और कमज़ोर ना समझिये , मैं हमेशा आपके साथ हूँ , और अगर आपको प्रॉब्लम है भी तो कोई मेडिसिन ले लीजिये , और सो जाइये इतना पीना ठीक नहीं , तो उन्होंने हामी में सर हिलाया और मुझे लगा, की अब वो depresion से बहार आ जायेंगे ,पर अब स्थिति और भी बदतर हो गयी वो मुझ से डरने लगे और घर के बदले बाहर पीने लगे
इतना ही नहीं उन्हें बाहर कुछ सस्ते बार और नीच किस्म के शराबी दोस्त भी मिल गए, जो दिन भर मेरे पिता के पैसो से पीते और फिर उन्हें माँ के बारे में नुक्ताचीनी कर के, पीने को मज़बूर कर देते और उन्हें बेचारा महसूस कराते।
घर आने पर वो मुझ से रोज़ प्रॉमिस करते, की वो अब नहीं पिएंगे पर वो उन्हें पूरा नहीं कर पाते, वो रोज़ गिड़गिड़ाते हुए मुझसे माफ़ी मांगते ,पर अगले दिन फिर वही होता , स्थिति पहले से भी खराब हो गयी थी ,वो अब इतना पी लेते थे की , वो लड़खड़ाते हुए या घुटनो के बल घर में आते थे , कभी - कभी घर आना भी भूल जाते , तब मैं उन्हें ढूंढ कर घर लाती ,कभी उनके चहरे पर इधर उधर गिरने के कारण हुए जख्मो के निशान होते ,पर वो आज भी पहले जैसे ही थे, वे मुझे प्यार करते माफ़ी मांगते और सो जाते।
मेरे पिता जहा होते उनको वहां से लाना , मुझ जैसी किशोर लड़की के लिए कोई साधरण बात नहीं थी ,कई बार मैं अपने साथ बैट ले के जाती , उनके दोस्त मुझसे डरते थे ,
मैं खुद को बहादुर दिखाने की बहुत कोशिश करती, पर मेरे जैसी लड़की के लिए भी ये बहुत मुश्किल था,
एक बार जब डैड नहीं आये, तो मैं उन्हें ढूढ़ने गयी , डैड एक बार में थे ,और एक लम्बा चौड़ा आदमी उन्हें मार- मार कर पैसे माग रहा था, डैड पूरी तरफ बेहोश थे , मैंने उस आदमी का हाथ पकड़ लिया और कहा मेरे पास पैसे नहीं है , और जाने कैसे डैड को घर ले आयी , मेरे लिए, ये मेरी उम्र और हिम्मत की सीमा से बहुत था, मैं अपनी जिंदगी इस तरह नहीं गुजार सकती थी , सलिए मैंने माँ के पा जाने का निर्णय लिया , ये सुनते ही मेरे पिता मुझे एक बहुत ही डरे हुए और हारे हुए इंसान की तरह देखने लगे , और उन्हें ऐसा देख कर बहुत दुःख हुआ , मैं ज़ोर ज़ोर से रोने लगी , मेरे डैड ने मुझे कभी इस तरह रोते हुए नहीं देखा था , उन्होंने निर्णय किया की वो शराब को हाथ भी नहीं लगाएंगे , उन्होंने अपनी सारी शराब की बोतले फेक दी ,और ऑफिस भी गए, अगले दिन मेरा पन्द्रहवा जन्म,दिन था , मैंने सोचा अब मैं कुछ दिन और डैड के साथ रहूंगी , उस दिन के बाद डैड ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया, वो समय से ऑफिस जाते मेरे साथ समय बिताते ,और खुश रहते उनका विशवास वापस आ गया था वो हर समय मुझसे बीते वक़्त के लिए माफ़ी मांगते ,हमारी जिंदगी वापस आ गयी थी , हमारी ख़ुशी वापस आ गयी थी , मेरे डैड हमेशा के लिए वापस आ गए थे।
आज मैं एक डॉक्टर हूँ और मुझे ब्रेन सर्जरी के लिए अवार्ड भी मिला है और ये सब मेरे डैडी के प्यार का नतीजा है , मेरी हिम्मत ने मुझे मेरे पिता नामशा के लिए वापस दे दिए थे,
नमस्ते दोस्तों , मेरा नाम सुमिता है , और मेरे पिता alcohalic है ,आप ये मत सोचिये की मैं, यहाँ आपके साथ कोई शराब पी कर , मार पीट करने वाली घटना या अनुभव बाटना चाहती हु , नहीं दोस्तों मेरी कहानी , इन सबसे अलग और अनोखी है , मैंने अपने जीवन में अपने पिता से अच्छा और, प्यार करने वाला व्यक्ति नहीं देखा है , वो एक बहुत ही ख्याल रखने वाले और, परिवार के लिए ही जीने वाले व्यक्ति हैं , और शायद परिवार के लिए इतना सेंसटिव होना ही, उनके alcohalic होने का कारण है।
दोस्तों बारह साल तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था , मेरे माता पिता दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते थे ,,मैं अपने आपको संसार की सबसे खुश नसीब लड़की समझती थी ,,मेरे सोचने से पहले ही मेरे माता पिता मेरी इच्छाओ को पूरा कर देते थे, मेरी माँ बहुत ही खूबसूरत और energetic महिला थी , और पिता सीधे साधे और शांत , सब कुछ अच्छा था की, एक शाम माँ ने आ कर कहा की उनको उनके लिए कोई और मिल गया है , और वो उसके साथ हमेशा के लिए जा रही है, और वो किसी दूसरे शहर में उसके साथ रहेंगी ,
उन्होंने ना डैड की तरफ देखा और ना ही उनसे कोई बात की ,डैड अजीब नज़रो लगातार देख रहे थे.
फिर माँ ने एक अजनबी की मेरा हाथ पकड़ कर कहा , सुमिता , मैं कोई कोर्ट केस नहीं करना चाहती, क्यूंकि मुझे पता है की ,तुम्हारे डैड से ज्यादा अच्छी तरह से तुंहारी देखभाल कोई नहीं करेगा,और फिर उन्हें तुम्हारी जरुरत भी होगी , मैं तुमसे मिलने आती रहूंगी , तुम यही डैड के साथ रहो , क्यूंकि यही सबके लिए ठीक होगा ,
दोस्तों , मैं ये समझ नहीं पा रही थी की मेरी माँ ऐसा क्यों कर रही है , , मेरी खुद की माँ ने मुझे धोखा दिया है, वह कैसे ये कर सकती है , एक माँ अपने बच्चे को कैसे छोड़ सकती है , मैं कैसे खुद को समझाऊ की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती, पर मुझे खुद को ये समझाना ही था की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,
दूसरी तरफ मेरे बेचारे डैड ,वह बहुत ही डिप्रेस्ड थे , हर समय उदास और दुखी रहते हसना तो जैसे वो भूल ही गए थे , कितना मुश्किल होता होगा उन्हें खुद को समझाना, की जिस पत्नी को वो इतना प्यार करते थे ,वो बिना कारण उन्हें छोड़ के किसी और के साथ गर्व से चली गयी।
उन्होंने फिर रोज़ शाम मुझ से इज़ाज़त ले के को वोडका के दो छोटे पैग पिने शुरू किये , उन्होंने कहा ,बेटी मुझे मत रोको इसे पीने से मुझे थोड़ी हिम्मत मिलती है , मुझे पता था मेरे डैड माँ को बहुत प्यार करते थे , सो उनके दुःख को समझते हुए सो मैं उन्हें मना ना कर सकी , और शायद यही मेरी बड़ी भूल थी , मेरे डैड की एक ही कमज़ोरी थी वह बहुत दृढ़ इच्छा शक्ति के स्वामी नहीं थे , और मैं , ऐ ये सब समझने के लिए बहुत छोटी थी , जबतक मेरी समझ में आया , बहुत देर हो गयी थी और डैड के दो पैग दो से चार चार से आठ और आठ से सोलह बन गए थे , पीते -पीते आराम कुर्सी पर ही सो जाते थे , और मैं उन्हें किसी तरह बिस्तर तक पहुँचती थी ,पर अब उनका पीना उनके काम पर भी असर करने लगा था , मैंने उन्हें समझाया की डैड आप खुद को इतना अकेला और कमज़ोर ना समझिये , मैं हमेशा आपके साथ हूँ , और अगर आपको प्रॉब्लम है भी तो कोई मेडिसिन ले लीजिये , और सो जाइये इतना पीना ठीक नहीं , तो उन्होंने हामी में सर हिलाया और मुझे लगा, की अब वो depresion से बहार आ जायेंगे ,पर अब स्थिति और भी बदतर हो गयी वो मुझ से डरने लगे और घर के बदले बाहर पीने लगे
इतना ही नहीं उन्हें बाहर कुछ सस्ते बार और नीच किस्म के शराबी दोस्त भी मिल गए, जो दिन भर मेरे पिता के पैसो से पीते और फिर उन्हें माँ के बारे में नुक्ताचीनी कर के, पीने को मज़बूर कर देते और उन्हें बेचारा महसूस कराते।
घर आने पर वो मुझ से रोज़ प्रॉमिस करते, की वो अब नहीं पिएंगे पर वो उन्हें पूरा नहीं कर पाते, वो रोज़ गिड़गिड़ाते हुए मुझसे माफ़ी मांगते ,पर अगले दिन फिर वही होता , स्थिति पहले से भी खराब हो गयी थी ,वो अब इतना पी लेते थे की , वो लड़खड़ाते हुए या घुटनो के बल घर में आते थे , कभी - कभी घर आना भी भूल जाते , तब मैं उन्हें ढूंढ कर घर लाती ,कभी उनके चहरे पर इधर उधर गिरने के कारण हुए जख्मो के निशान होते ,पर वो आज भी पहले जैसे ही थे, वे मुझे प्यार करते माफ़ी मांगते और सो जाते।
मेरे पिता जहा होते उनको वहां से लाना , मुझ जैसी किशोर लड़की के लिए कोई साधरण बात नहीं थी ,कई बार मैं अपने साथ बैट ले के जाती , उनके दोस्त मुझसे डरते थे ,
मैं खुद को बहादुर दिखाने की बहुत कोशिश करती, पर मेरे जैसी लड़की के लिए भी ये बहुत मुश्किल था,
एक बार जब डैड नहीं आये, तो मैं उन्हें ढूढ़ने गयी , डैड एक बार में थे ,और एक लम्बा चौड़ा आदमी उन्हें मार- मार कर पैसे माग रहा था, डैड पूरी तरफ बेहोश थे , मैंने उस आदमी का हाथ पकड़ लिया और कहा मेरे पास पैसे नहीं है , और जाने कैसे डैड को घर ले आयी , मेरे लिए, ये मेरी उम्र और हिम्मत की सीमा से बहुत था, मैं अपनी जिंदगी इस तरह नहीं गुजार सकती थी , सलिए मैंने माँ के पा जाने का निर्णय लिया , ये सुनते ही मेरे पिता मुझे एक बहुत ही डरे हुए और हारे हुए इंसान की तरह देखने लगे , और उन्हें ऐसा देख कर बहुत दुःख हुआ , मैं ज़ोर ज़ोर से रोने लगी , मेरे डैड ने मुझे कभी इस तरह रोते हुए नहीं देखा था , उन्होंने निर्णय किया की वो शराब को हाथ भी नहीं लगाएंगे , उन्होंने अपनी सारी शराब की बोतले फेक दी ,और ऑफिस भी गए, अगले दिन मेरा पन्द्रहवा जन्म,दिन था , मैंने सोचा अब मैं कुछ दिन और डैड के साथ रहूंगी , उस दिन के बाद डैड ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया, वो समय से ऑफिस जाते मेरे साथ समय बिताते ,और खुश रहते उनका विशवास वापस आ गया था वो हर समय मुझसे बीते वक़्त के लिए माफ़ी मांगते ,हमारी जिंदगी वापस आ गयी थी , हमारी ख़ुशी वापस आ गयी थी , मेरे डैड हमेशा के लिए वापस आ गए थे।
आज मैं एक डॉक्टर हूँ और मुझे ब्रेन सर्जरी के लिए अवार्ड भी मिला है और ये सब मेरे डैडी के प्यार का नतीजा है , मेरी हिम्मत ने मुझे मेरे पिता नामशा के लिए वापस दे दिए थे,
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