Saturday, 25 May 2019

पहचान 


मेरे माता पिता मेरे भाई को मुझसे ज्यादा प्यार करते है। 
मेरे प्यारे दोस्तों, मेरा या अनुभव शायद आपको अजीब लगे ,पर ये अनुभव मेरे लिए  लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्यूंकि इसके दवारा ही मुझे  जिंदगी में रिश्तो की पहचान करना आया है , अपनी कमजोरी का ज्ञान हुआ है ,
और खुद को समझने का मौका भी मिला है।
ये बात उस समय की है जब मैं मात्र 7  साल की थी ,  माँ ने बताया की वो मेरे लिए एक भाई लानेवाली है, क्यूंकि मैं  अकेली हूँ , और मेरी देखभाल और सबसे रक्षा करने के लिए मुझे एक वीर पुरुष चाहिए , वो मेरा रक्षक  ताउम्र के ले लिए  सिर्फ मेरा होगा और मुझे , मेरे भाई के रूप में मिलेगा , जो मेरी हर बात मानेगा , मैं  बहुत खुश हो गयी , और अपनी हर उस सहेली के बारे में सोचने लगी जो अपने घर में आराम से अपने भाई  के साथ खेलती थी , और जिन्हे किसी दोस्त की जरुरत नहीं थी , मैं बस अपने भाई के आने का इंतज़ार करने लगी , और फिर धीरे धीरे वह समय भी आ गया जब मेरा भाई इस दुनिया में आ गया..
माँ हॉस्पिटल में थी ,पापा बहुत खुश थे दादी, चाचा, चाची और मेरे सभी जानने पहचान ने  वाले लोग भी  बहुत खुश थे , भाई के आने की पार्टी मांगी जा रही थी , और मैं  समझ नहीं पा रही मेरे भाई के आने से भला इन्हे इतनी ख़ुशी क्यों है ? किसी को मेरा ख्याल भी नहीं था दादी ,पापा,चाचा सब मेरे भाई को घर में कहा रखना है ,उसके लिए क्या क्या चाहिए ?सब इसी सोच में थे , आज किसी को रोज़ की तरह ना मेरे खाने का और न ही, मेरे  टिफ़िन , मेरे  स्कूल कि कोई चिंता  थी , जैसे मैं हूँ ही नहीं ,
 वैसे तो मुझे स्कूल से छुट्टी लेने पर मेरे माता पिता बहुत नाराज़ होते , पर आज  पापा आये और बिना मेरी तरफ देखे बोले , तुम आज छुट्टी ले कर घर में ही रहो , मुझे भाई के पास जाना है , और माँ को घर लाना है , मैंने सर हिलाया , पापा ने मेरे से कुछ भी नहीं पूछा की , मैंने कुछ खाया या नहीं मैं क्यों उदास हूँ ? ये सोचंने का भी किसी को समय नहीं था, और मैं सोच रही थी की की माँ ने ये कैसा भाई मुझे दिया है ,जिसके आते ही सब मुझे भूल कर उसी  की चिंता में लग गए थे। ना जाने क्यों मुझे भाई का आना अचछा नहीं लगा। शाम को माँ भाई को ले के आ गयी , मैं सब भूल के बहुत खुश हो गयी और उसके छोटे- छोटे हाथ पैर सब कुछ देख कर मुझे लगा शायद , ये भी कोई माँ- पापा का लाया कोई खिलौना है , जिसे मैं जैसे चाहो खेल सकती हूँ  , आखिर इससे पहले भी तो सब कुछ मेरे लिए ही तो लाते थे , मैंने अपने भाई का हाथ पकड़ लिया की माँ ज़ोर से चिल्लाई ,अरे दूर रहो उससे  , छूना नहीं पहले हाथ धो कर आओ , मैं हैरान हो गयी और माँ के पास जाने लगी ,सब चिल्लाये दूर रहो माँ के पास मत जाना , माँ का ओपरेशन हुआ है , मैं दूर  बैठ गयी , और देखने लगी सब उस भाई को ही प्यार कर रहे थे माँ भी मुझे भूल गयी थी , पापा शाम  को भाई के लिए पालना लाये , और मेरे लिए कुछ भी नहीं बस मेरे पास आ कर बोले अब खुश हो ना भाई आ गया। मैं कुछ भी ना बोल पायी और , मुझे भाई के आने में ख़ुशी की कोई वजह भी नज़र ना आयी , इसी तरह 2 साल बीत गए और वो भी चलने लगा , और फिर धीरे -धीरे स्कूल भी जाने लगा , वैसे तो वो बहुत ही प्यारा और छोटा सा बच्चा था पर ,  मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं आता , माँ उसे मेरी हर चीज़ दे देती , और अब मेरी जगह माँ के पास भी वही सोता था , उसे कोई नहीं डाँटता वो मेरी हर चीज़ खराब करता , और अगर मैं उसे ज़रा भी छूती तो सब मुझे डाँटने लगते , भाई को ले माँ पापा ज़्यदातर हॉस्पिटल के चक्कर ही  काटते रहते ,ना उन्हें मेरी parents meet याद रहती ना ही annual day ,.
भाई अब 6 साल का हो गया था ,वो मेरे पास आने की या मुझसे बात करने की कोशिश करता, पर मुझे वो बिलकुल भी पसंद ना था ,  क्यूंकि उसकी वजह से मेरे माँ पापा सब मुझसे दूर हो गए थे , पर मेरे चेहरे पर आये गुस्से को देख बस दूर से मुझे देखता। ,
पापा और माँ ने निर्णय लिया की भाई की देखभाल के कारण वो मुझे समय नहीं दे पा  रहे  है ,इसलिए मुझे हॉस्टल में डाल देना चाहिए , मुझे पूरा विश्वास था की क्यूंकि , मेरे माता पिता मुझसे ज्यादा मेरे भाई को प्यार करते है और दूसरे मैं लड़की हूँ इसलिए ,मेरे माता पिता मेरे साथ ऐसा व्यवहार कर रहे है , मेरी माँ जो मुझसे कभी दूर नहीं होना चाहती थी , ने मेरे लाख मिन्नतें करने पर भी मुझे हॉस्टल भेज दिया। , माँ पापा कभी मुझसे मिलने नहीं आये मैं ही छुट्टियों में घर आती , और माँ पापा को भाई को ले कर हॉस्पिटल के चककर लगते देखा करती ,मेरा 15वा  जन्मदिन आ रहा था , पापा ने मुझसे वादा  किया था की , वो मुझे लेडीज साइकिल ला कर देंगे , मैं बहुत खुश  थी ,पर जन्मदिन की सुबह ही माँ ने कहा की दो दिन बाद भाई का ओप्रशन है ,क्यूंकि उसके दिल में छेद है , इसलिए इस जन्मदिन पर मेरी साइकिल नहीं आ पायेगी।
मैं बहुत रोई पर मैंने देखा की मेरा भाई चुपचाप मुझे देख रहा है , मैंने भाई के ओप्रशन के बारे में कुछ भी नहीं पूछा , मैंने अगले दिन ही जाने का फैसला कर लिया , माँ बोली भाई के ओप्रशन के लिए रुक जाओ , तो मैंने गुस्से और नफरत से कहा मेरा कोई भाई नहीं है , मुझे कोई भाई नहीं चाहिए मैं कल चली जाउंगी , मेरा भाई तब भी मुझे देख रहा था , मेरी नफरत ने उसे कभी मेरे पास नहीं आने दिया , सुबह होते ही मैं हॉस्टल वापस चली गयी.
  हॉस्टल पहुंच कर जब मैंने अपना बैग देखा तो उसमे एक पत्र था , मेरे छोटे   भाई का पत्र , मैं हैरान हो गयी , उसमे लिखा था:
 "प्यारी दीदी , मेरे कारण आपको बड़ा दुःख हुआ ,पर दीदी मैं आपको बहुत प्यार करता  हूँ ,और आपको  इतना उदास नहीं देख सकता , मैं आपको हमेशा खुश रखने के लिए स्वस्थ होना चाहता हूँ , मुझे ओप्रशन से बहुत डर लगता है , डॉक्टर अंकल ने कहा की , जन्म से ही मेरे दिल में छेद है , अगर मैं ओप्रशन करवा लू तो आपको हमेशा खुश रख सकूंगा , दीदी मैं ओप्रशन के लिए त्यार हूँ ,पर अगर मैं वापस घर ना आ सका ,तो आपको ये कैसे पता चलेगा की , मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ , और हाँ मैंने आपके कमरे में आपके लिए एक तोहफा भी रखा है , शायद आपको पसंद आये , दीदी ये मेरे 7 जन्मदिनों तक बचाये  हुए पैसो से खरीदा है , मुझे पता है आप मुझसे नराज़  है ,  पर इसे जरूर स्वीकार कीजियेगा ,.
आपका भाई।
दोस्तों , मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था ,ऐसा कैसे हो सकता था , मैं इतनी स्वार्थी कैसे हो सकती थी , माँ पापा का दुःख भाई की तकलीफ मुझे किसी का भी एहसास नहीं था उफ़ !की मुझे अपने परिवार में हो रही इतनी बड़ी घटना के बारे में भी नहीं पता , मैं  अगली बस से ही घर पहुंची भाई हॉस्पिटल में मौत से खेल रहा था , माँ पापा का बुरा हाल था , जब मैंने भाई का कमरा खुला थो वह वही साइकिल थी, जिसे मैं लेना चाहती थी,साइकिल पे लिखा था मेरी दीदी के लिए हुए बड़ा सा  SORRY भी । मैं उस  साइकिल से चिपक कर बहुत रोई मुझे बस मेरा भाई चाहिए था।
मैं हॉस्पिटल पहुंची भाई ICU था अभी होश नहीं आया था मैं बस रोये जा रही थी आज मुझे माँ ,पापा, साइकिल ,खाना ,खिलोने कुछ भी नहीं चाहिए था बस मुझे मेरा भाई चाहिए था।
कुछ देर बाद भाई होश में आ गया मैं उसे देखने अंदर गयी पहली बार भाई को ध्यान से देखा बिलकुल मेरा ही प्रतिरूप, उसके  चारो तरफ TUBE  लगे हुए थे , और वो मेरी तरफ देख रहा था उदास आँखों से , मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया , और रो पड़ी मुझे मेरा भाई मिल गया था , और वो उस दर्द में भी मुस्कुरा उठा ,जल्दी ही हम लोग भाई को ले कर घर वापस आ गये ,दोस्तों, आज  माता पिता का  ही नहीं , मेरा भाई मेरी भी जिंदगी है ,और मैं समझ गयी हु की माता पिता हर बच्चे को सामान प्यार करते है। माता पिता ने मुझे उस  दुःख से मुझे दूर करने के लिए हॉस्टल भेजा था, आज मैं मेरे माता पिता और मेरा भाई इन सभी से अपने  रिश्तो की गंभीरता को जान गयी हूँ।









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