Friday, 22 March 2019

mere pita shrabi hai
नमस्ते दोस्तों , मेरा नाम सुमिता है , और मेरे पिता alcohalic  है  ,आप ये मत सोचिये की मैं, यहाँ आपके साथ कोई शराब पी कर , मार पीट करने वाली घटना  या अनुभव बाटना चाहती हु , नहीं दोस्तों मेरी कहानी , इन सबसे  अलग और अनोखी है , मैंने अपने जीवन में अपने पिता से अच्छा और, प्यार करने वाला व्यक्ति नहीं देखा  है , वो एक बहुत ही ख्याल रखने वाले और, परिवार के लिए ही जीने वाले व्यक्ति हैं , और शायद परिवार के लिए इतना सेंसटिव होना ही, उनके alcohalic  होने का कारण है।
दोस्तों बारह साल तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था , मेरे माता पिता दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते थे ,,मैं अपने आपको संसार की सबसे खुश नसीब लड़की समझती थी ,,मेरे सोचने से पहले ही मेरे माता पिता मेरी इच्छाओ को पूरा कर देते थे,  मेरी माँ बहुत ही खूबसूरत और energetic महिला थी , और पिता सीधे साधे  और शांत , सब कुछ अच्छा था की, एक शाम माँ ने आ कर कहा की उनको उनके लिए कोई और मिल गया है , और वो उसके साथ हमेशा के लिए जा रही है, और वो किसी दूसरे शहर में उसके साथ रहेंगी ,
उन्होंने ना डैड की तरफ देखा और ना ही उनसे कोई बात की ,डैड अजीब नज़रो  लगातार देख रहे थे.
 फिर माँ ने एक अजनबी की  मेरा हाथ पकड़ कर कहा , सुमिता , मैं कोई कोर्ट केस नहीं करना चाहती, क्यूंकि मुझे पता है की ,तुम्हारे डैड से ज्यादा अच्छी तरह से तुंहारी देखभाल कोई नहीं करेगा,और फिर उन्हें तुम्हारी जरुरत भी होगी , मैं तुमसे मिलने आती रहूंगी , तुम यही डैड के साथ रहो , क्यूंकि यही सबके लिए ठीक होगा ,
 दोस्तों , मैं ये समझ नहीं पा रही थी की मेरी माँ ऐसा क्यों कर रही है , , मेरी खुद की माँ ने मुझे धोखा दिया है, वह कैसे ये कर सकती है , एक माँ अपने बच्चे को कैसे छोड़ सकती है , मैं कैसे खुद को समझाऊ  की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती, पर मुझे खुद को ये समझाना ही था की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,
दूसरी तरफ मेरे बेचारे डैड ,वह बहुत ही डिप्रेस्ड थे , हर समय उदास  और दुखी रहते हसना तो जैसे वो भूल ही गए थे , कितना मुश्किल होता होगा उन्हें खुद को समझाना, की जिस पत्नी को वो इतना प्यार करते थे ,वो बिना कारण उन्हें छोड़  के किसी और के साथ गर्व से चली गयी।
उन्होंने फिर रोज़ शाम मुझ से इज़ाज़त ले  के को वोडका के दो छोटे पैग   पिने शुरू किये , उन्होंने कहा ,बेटी मुझे मत रोको इसे पीने से मुझे थोड़ी हिम्मत मिलती है , मुझे पता था मेरे डैड माँ को बहुत प्यार करते थे , सो उनके दुःख को समझते हुए सो मैं उन्हें मना ना कर सकी , और शायद यही मेरी बड़ी भूल थी , मेरे डैड की एक ही कमज़ोरी थी वह बहुत दृढ़ इच्छा शक्ति  के स्वामी नहीं थे , और मैं , ऐ ये सब समझने के लिए बहुत छोटी थी , जबतक मेरी समझ में आया , बहुत देर हो गयी थी और डैड के दो पैग दो से चार चार से आठ और आठ से सोलह बन गए थे ,  पीते -पीते आराम कुर्सी पर ही सो जाते थे , और मैं उन्हें किसी तरह बिस्तर तक पहुँचती थी ,पर अब उनका पीना उनके काम पर भी असर करने लगा था , मैंने उन्हें समझाया की डैड आप खुद को इतना अकेला और कमज़ोर ना समझिये , मैं हमेशा आपके साथ हूँ , और अगर आपको प्रॉब्लम है भी तो कोई मेडिसिन ले लीजिये , और सो जाइये इतना पीना ठीक नहीं , तो उन्होंने हामी में सर हिलाया और मुझे लगा, की अब वो depresion  से बहार आ जायेंगे ,पर अब स्थिति और भी बदतर हो गयी वो मुझ से डरने लगे और घर के बदले बाहर पीने लगे
इतना ही नहीं उन्हें बाहर कुछ सस्ते बार और नीच किस्म के शराबी दोस्त भी मिल गए, जो दिन भर मेरे पिता के पैसो से पीते और फिर उन्हें माँ के बारे में नुक्ताचीनी कर के, पीने को मज़बूर कर देते और उन्हें  बेचारा महसूस कराते।
घर आने पर वो मुझ से रोज़ प्रॉमिस करते, की वो अब नहीं पिएंगे पर वो उन्हें पूरा नहीं कर पाते, वो रोज़  गिड़गिड़ाते हुए  मुझसे माफ़ी मांगते ,पर अगले दिन फिर वही होता , स्थिति पहले से भी खराब हो गयी थी ,वो अब इतना पी लेते थे की ,  वो लड़खड़ाते हुए या घुटनो के बल घर में आते थे , कभी - कभी घर आना भी भूल जाते , तब मैं उन्हें ढूंढ  कर घर लाती ,कभी उनके चहरे पर इधर उधर गिरने के कारण हुए जख्मो  के निशान होते ,पर वो आज भी पहले जैसे ही थे, वे  मुझे प्यार करते  माफ़ी मांगते और सो जाते।
मेरे पिता जहा होते उनको वहां  से लाना , मुझ जैसी  किशोर लड़की के लिए कोई साधरण बात नहीं थी ,कई बार मैं अपने साथ बैट  ले के जाती , उनके दोस्त मुझसे डरते थे ,
मैं खुद को बहादुर दिखाने की बहुत कोशिश करती, पर मेरे जैसी लड़की के लिए भी ये बहुत मुश्किल था,
एक बार जब डैड नहीं आये, तो मैं उन्हें ढूढ़ने गयी , डैड एक बार में थे ,और एक लम्बा चौड़ा  आदमी उन्हें मार- मार  कर पैसे माग  रहा था, डैड पूरी तरफ बेहोश थे , मैंने उस आदमी का हाथ पकड़ लिया और कहा मेरे पास पैसे नहीं है , और जाने कैसे डैड को घर ले आयी , मेरे लिए, ये मेरी उम्र और हिम्मत की सीमा से बहुत था, मैं अपनी जिंदगी इस तरह नहीं गुजार सकती थी , सलिए मैंने माँ के पा जाने का निर्णय लिया , ये सुनते ही मेरे पिता मुझे एक बहुत ही डरे हुए और हारे हुए इंसान की तरह देखने लगे , और उन्हें ऐसा देख कर बहुत दुःख हुआ , मैं  ज़ोर ज़ोर से रोने लगी , मेरे डैड ने मुझे कभी इस तरह रोते  हुए नहीं देखा था , उन्होंने निर्णय किया की वो शराब को हाथ भी नहीं लगाएंगे , उन्होंने अपनी सारी  शराब की बोतले फेक दी ,और ऑफिस भी गए, अगले दिन मेरा पन्द्रहवा जन्म,दिन था , मैंने सोचा अब मैं कुछ दिन और डैड  के साथ रहूंगी , उस दिन के बाद डैड ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया, वो समय से ऑफिस जाते मेरे साथ समय बिताते ,और खुश रहते उनका विशवास वापस आ गया था  वो हर समय मुझसे बीते वक़्त के लिए माफ़ी मांगते ,हमारी जिंदगी वापस आ गयी थी , हमारी ख़ुशी वापस आ  गयी थी , मेरे डैड हमेशा के लिए वापस आ गए थे।
 आज मैं एक डॉक्टर हूँ और मुझे ब्रेन सर्जरी के लिए अवार्ड भी मिला है और ये सब  मेरे डैडी के प्यार का नतीजा है , मेरी हिम्मत ने मुझे मेरे पिता नामशा के लिए वापस दे दिए  थे,

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