Saturday, 25 May 2019

नमस्ते दोस्तों मेरा नाम सुमिता है ,और मेरे पिता शराबी है , नहीं ये मत सोचिये की मैं यहाँ आपके साथ कोई शराब पी कर मार पीट करने वाली कहानी और अनुभव बाटना चाहती हु , नहीं दोस्तों मेरी कहानी इन सबसे  अलग और अनोखी है , मैंने अपने जीवन में अपने पिता से अच्छा और प्यार करने वाला व्यक्ति नहीं देखा  है , वो एक बहुत ही ख्याल रखने वाले और परिवार के लिए ही जीने वाले व्यक्ति हैं , और शायद परिवार के लिए इतना सेंसटिव होना ही उनके alcohalic  होने का कारण है।
दोस्तों बारह साल तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था , मेरे माता पिता दोनों ही मुझे बहुत प्यार करते थे ,मैं अपने आपको संसार की सबसे खुश नसीब लड़की समझती थी ,मेरे सोचने से पहले ही मेरे माता पिता मेरी इच्छाओ को पूरा कर देते थे , मेरी माँ


 बहुत ही खूबसूरत और energetic महिला थी , और पिता सीधे साधे  और शांत ,सब कुछ अच्छा था की एक शाम माँ ने आ कर कहा की उनको उनके लिए कोई और मिल गया है , और वो उसके साथ हमेशा के लिए जा रही है और वो किसी दूसरे शहर में उसके साथ रहेंगी
फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर कहा सुमिता मैं कोई कोर्ट केस नहीं करना चाहती क्यूंकि मुझे पता है की तुम्हारे डैड से ज्यादा अच्छी तरह से तुंहारी देखभाल कोई नहीं करेगा,और फिर उन्हें तुम्हारी जरुरत भी होगी ,मैं तुमसे मिलने आती रहूंगी ,तुम यही दादी के साथ रहो ,क्यूंकि यही सबके लिए ठीक होगा ,
आपको लगता है की मैं आपको, बस यही बताना चाहती हूँ की मेरी खुद की माँ ने मुझे धोखा दिया है,वह कैसे ये वदेसीडे कर सकती है ,एक माँ अपने बच्चे को कैसे छोड़ सकती है ,मैं कैसे समझू की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,पर मुझे खुद को ये समझाना ही था की मेरी माँ मुझे पसंद नहीं करती,
दूसरी तरफ मेरे बेचारे डैड वह बहुत ही डिप्रेस्ड थे ,हर समय उड़स और दुखी रहते हसना तो जैसे वो भूल ही गए थे ,कितना मुश्किल होता होगा उन्हें खुद को समझाना की जिस पत्नी को वो इतना प्यार करते थे वो बिना कारण उन्हें छोड़  के किसी और के साथ गर्व से चली गयी ,
उन्होंने रोज़ शाम को वोडका के दो छोटे पैग  मुझ से इज़ाज़त ले  के पिने शुरू किये ,उन्होंने कहा ,बेटी मुझे मत रोको मुझे थोड़ी हिम्मत मिलती है ,मुझे पता था मेरे डैड माँ को बहुत प्यार करते थे ,सो मैं उन्हें मना ना कर सकी ,और शायद यही मेरी बड़ी भूल थी ,मेरे डैड की एक ही कमज़ोरी थी वह बहुत स्ट्रांग महस्थिति के स्वामी नहीं थे ,और मैं ऐ ये सब समझने के लिए बहुत छोटी थी , जबतक मेरी समझ में आये बहुत देर हो गयी थी डैड के दो पैग दो से चार चार से आठ और आठ से सोलह बन गए थे ,वो पीते पीते आराम कुर्सी पर ही सो जाते थे और मैं उन्हें किसी तरह बीएड तक पहुँचती थी ,पर अब उनका पीना उनके काम पर भी असर करने लगा था ,मैंने उन्हें समझाया की डैड आप खुद को इतना अकेला और कमज़ोर ना समझिये और अगर आपको प्रॉब्लम है तो कोई मेडिसिन ले लीजिये और सो जाइये इतना पीना ठीक नहीं ,तो उन्होंने हामी में सर हिलाया और मुझे लगा की अब वो depresion  से बहार आ जायेंगे ,पर अब स्थिति और भी बदतर हो गयी वो मुझ से डरने लगे और घर के बदले बाहर पीने लगे
इतना ही नहीं उन्हें बहार कुछ सस्ते बार और नीच किस्म के दोस्त भी मिल गए जो दिन भर मेरे पिता के पैसो से पीते और उन्हें बहुत बेचारा महसूस कराते।
वो मुझसे से रोज़ प्रॉमिस करते की वो अब नहीं पिएंगे पर वो उन्हें पूरा नहीं कर पाते वो रट गिड़गिड़ाते मुझसे माफ़ी मांगते पर अगले दिन फिर वही होता , स्थिति पहले से भी खराब हो गयी थी वो इतना पी लेते थे की ,अब वो लड़खड़ाते हुए या घुटनो के बल घर में आते थे, कभी कभी घर आना भी भूल जाते तब मैं उन्हें ढूंढ  कर घर लाती ,कभी उनके चहरे पर इधर उधर गिरने के कारण हुए जख्म के निशान होते ,पर वो आज भी पहले जैसे ही थे मुझे प्यार करतये माफ़ी मांगते और सो जाते।
मेरे पिता जहा होते उनको वहां  से लाना मुझ जैसी  किशोर लड़की के लिए कोई साधरण बात नहीं थी ,कई बार मैं अपने साथ बात ले के जाती ,उनके दोस्त मुझसे डरते थे ,
मई खुद को बहदुर दिखने की बहुत कोशिश करती पर मेरे जैसी लड़की के लिए भी ये बहुत मुश्किल था,
एक बार जब डैड नहीं आये तो मैं उन्हें ढूढ़ने गयी ,डैड एक बार में थे और एक लम्बा छोड़ा आदमी उन्हें मार कर पैसे मान रहा था डैड पूरी तरफ बेहोश थे ,मैंने उस आदमी का हाथ पकड़ लिया और कहा मेरे पास पैसे नहीं है ,और जाने कैसे डैड को घर ले आयी , मेरे लिए ये मेरी उम्र और हिम्मत की सीमा से बहुत था, मैं अपनी जिंदगी इस तरह नहीं गुजार सकती थी ,इसलिए मैंने माँ के पा जाने का निर्णय लिया ,ये सुनते ही मेरे पिता मुझे एक बहुत ही डरे हुए और हारे हुए इंसान की तरह देखने लगे ,और मैं  ज़ोर ज़ोर से रोने लगी , मेरे डैड ने मुझे कभी रट हुए नहीं देखा था उन्होंने निर्णय किया की वो शराब को हाथ भी नहीं लगाएंगे ,उन्होंने अपनी साड़ी शराब की बोतले फेक दी और ऑफिस भी गए अगले दिन मेरा पन्द्रहवा जन्म,दिन था ,मैंने सोचा अब मैं कुछ दिन और डैड  के साथ रहूंगी,ओस दिन के बाद डैड ने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया वो समय से ऑफिस जाते मेरे साथ समय बिताते और खुश रहते उनका विशवास वापस आ गया था ,वो हर समय मुझसे बीते वक़्त के लिए माफ़ी मांगते ,हमारी जिंदगी वापस आ गयी थी
 आज मैं एक डॉक्टर हूँ और मुझे ब्रेन सर्जरी के लिए अवार्ड भी मिला है और ये सब  मेरे डैडी के प्यार का नतीजा है ,मेरी हिम्मत ने मुझे मेरे पिता वापस दे दिए है। 

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